Sunday, October 18, 2020

सुदर्शन तैयार रखना आगे बहुत लड़ैया रे

लेखक:- शिवम कुमार पाण्डेय

क्या कह रहे हो ? क्या हो रहा है देश में? यहां हर कोई अपने आप को राजनीति में युवा और जुझारू नेता कहता है भले सिर के बाल झड़ गए हो। एक कहावत है न "उम्र पचपन का दिल बचपन का"।उम्र भले 50 के पार चली गई हो तो क्या फर्क पड़ता है प्रधानमंत्री पद के लिए तो अभी भी युवा ही है। मुंह से बोलने से नहीं होता है न उसके लिए मेहनत और संघर्ष करना पड़ता हैं। यहां तो कुछ और ही है बैठे बिठाए राज पाठ मिल गया है। कहने को लोकतंत्र है पर राजनीतिक पार्टियां तो परिवारवाद के दम पर ही चल रही है।पिता के बाद पुत्र ही पार्टी का कार्यभार संभालेगा। महलों में पलने वाले ये लोग कहते है "हमारी पार्टी गरीबों के हक लिए लड़ती है"। राज्य में सरकार टूटने के डर से पार्टी के विधायकों के साथ पांच सितारा होटलों के वातानुकूलित कमरे बैठकर मस्त तंदूरी रोटी तोड़ने वाले लोग भी कहते है "हमारी पार्टी किसानों और बेरोजगारों के हक लिए लड़ती है"! मतलब अब ऐसे गंभीर चर्चे महलों और पंचतारा कमरों में बैठकर होते हैं। विधान सभा और संसद तो बस हंगामा खड़ा करने लिए है वहा कोई सार्थक वार्तालाप थोड़ी न कि जा सकती है इससे लोकतंत्र खतरे में जो आ जायेगा।

इनकी खुद की संतान ब्रिटेन , अमेरिका , ऑस्ट्रेलिया आदि जगहों पर शिक्षा लेने जाती हैं। दूसरों के बच्चो से ये लोग चाहते है कि इनके लिए आंदोलन करे ,जगह- जगह पर आगजनी और हिंसा करे , दूर कश्मीर में कही सेना के जवानों पर पत्थर फेंके, आतंकी जिहादी नारे लगाए, नक्सलियों के गुण गाए आदि। ऐसे संकीर्ण मानसिकता वालो को बस अपना घर भरना रहता है  भले दूसरे का घर उजड़ जाए। सत्ता के भूखे- प्यासे लोग विदेशी शत्रुओं का समर्थन करने से भी बाज नहीं आते है। अभिव्यक्ति आजादी के आड़ में देश जाए भाड़ में कहते है। विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में भी एक ऐसी ही विचारधारा पनप चुकी है जो खुद को बुद्धिजीवी वर्ग समझती है ऐसे लोगों का खुलेआम समर्थन करते है। ये सबकुछ तथाकथित छात्रों और प्रफेसरो की वजह से होता है जो सिर्फ अपनी ही बात करते है और दूसरे कत्तई सुनना नहीं चाहते है। ये वही लंपट लोग है जो राजशाही का विरोध करते है पर वर्तमान में  चल रहे परिवारवाद या वंशवाद की राजनीति पर इनको सांप सूंघ जाता है। बहुत क्रांतिकारी दिखाते है सब खुद को लेकिन किसी तथाकथित पार्टी का अध्यक्ष का लड़का विदेश पढ़कर आता है जो भारतीय राजनीति से एकदम अनिभिज्ञ है उसे अपना भैया बना लेते है ये लोग इस तरह बना बनाया एक प्लेटफॉर्म मिल जाता है और वंशवाद फूल जाता है। ऐसी ही तथाकथित लोग ब्राह्मणवाद का विरोध करते हैं जिसके बारे में यह तनिक जानते भी नहीं है। ऐसे लोगो से सतर्क रहना चाहिए खासकर युवाओं जो इनके बहकावे में देश विरोधी तत्वों का समर्थन करने लग जाते है। भड़काना, भटकाना और लड़वाना इनका मुख्य कार्य होता है। किसी भी व्यक्ति जो अपना जीवन शांति से जी रहा है उसके जीवन में भूचाल का लाने से तनिक से भी नहीं हिकिचाते है। इनका समूल विनाश करना बहुत जरूरी गया है। इनके ऊपर सख्त कार्रवाई की जरूरत है नहीं वो दिन दूर जब भारत अंदर खोखला हो चुका होगा। कहने तात्पर्य यही है कि शैतान और उसकी नाजायज औलाद लाख कोशिश करेंगे तहलका मचाने की तुम सुदर्शन चक्र तैयार रखना।

25 comments:

  1. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (१९-१०-२०२०) को 'माता की वन्दना' (चर्चा अंक-३८५९) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    --
    अनीता सैनी

    ReplyDelete
    Replies
    1. जी आपका बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार आदरणीय मैम चर्चा मंच पर स्थान देने हेतु।🌻🙏

      Delete
  2. Replies
    1. आपका बहुत धन्यवाद सिद्धार्थ जी।

      Delete
  3. वाह, क्या खूब लिखा है आपने। उम्दा और जबरदस्त लेख।

    ReplyDelete
  4. कहने को लोकतंत्र है पर राजनीतिक पार्टियां तो परिवारवाद के दम पर ही चल रही है।पिता के बाद पुत्र ही पार्टी का कार्यभार संभालेगा।
    बहुत अच्छा खाका खींचा है आपने ...
    बहुत सुन्दर लेख।

    ReplyDelete
    Replies
    1. जी आपका बहुत धन्यवाद एवं आभार सुधा जी।

      Delete
  5. बेहद सुन्दर लेख

    ReplyDelete
    Replies
    1. जी आपका बहुत आभार। स्वागत है आपका राष्ट्रचिंतक ब्लॉग पर

      Delete
  6. "शैतान और उसकी नाजायज औलाद लाख कोशिश करेंगे तहलका मचाने की तुम सुदर्शन चक्र तैयार रखना।"
    लाजवाब अभिव्यक्ति।

    ReplyDelete
  7. Replies
    1. जी आपका बहुत धन्यवाद एवं आभार सधु जी।

      Delete
  8. Replies
    1. जी आपका बहुत धन्यवाद। स्वागत है आपका राष्ट्रचिंतक ब्लॉग पर।

      Delete