Friday, May 27, 2022

वजूद

तुम्हारा वजूद क्या है ?
 जब भी आईने में शक्ल देखता हूं 
तो यह प्रश्न उठता है!
बिना मेहनत संघर्ष के कुछ नही मिलता है!
 तुम्हारा वजूद क्या है?
जब भी मैं अपनी आत्मा से बात करता हु तो प्रश्न उठता है! 
ईमानदारी और सच्चाई का दामन कभी मत छोड़ना
बिकने को तो हर दिन दो पैसे में भड़वा बिकता है!
तुम्हारा वजूद क्या है ?
स्नान करता हु सर पर जब ठंडा पानी गिरता है, 
यह प्रश्न उठता है!
सूरज के उगने से पहले जागो,
 तलवे चाटने के बाद तो 
कुत्ता भी दिनभर सोता है।

Saturday, May 14, 2022

साक्ष्यों के बल पर हिन्दू अपना हक ले रहा है

लोग रामायण, महाभारत, गीता जैसे धर्मग्रंथों से ही सीखते हैं और आज के लोग उसको फालो भी कर रहे हैं... 

महाभारत में जब पांडव का बारह वर्ष का वनवास और एक वर्ष का अज्ञातवास खत्म हुआ तो उन्होंने अपना राज्य इंद्रप्रस्थ को कौरवों से मांगा, और इसके लिए पांडवों ने भगवान श्री कृष्ण को अपना दूत बना कर भेजा, भगवान श्रीकृष्ण युद्ध नहीं चाहते थे और पांडव भी युद्ध नहीं चाहते थे। 
भगवान श्रीकृष्ण ने धृतराष्ट्र की भरी सभा में शांति का प्रस्ताव रखते हैं और पांडवों का इंद्रप्रस्थ मांगते हैं लेकिन दुर्योधन कहता है कि वह इंद्रप्रस्थ नहीं देगा और पूरी हस्तिनापुर की धृतराष्ट्र सभा मौन रहते हैं। इस पर भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि ठीक है दुर्योधन पांडवों को केवल पांच गांव ( अविस्थल, वकरास्थल, मकांडि, वरणाव्रत और एक कोई भी गांव) लेकिन दुर्योधन भगवान श्रीकृष्ण के इस शांति प्रस्ताव को ठुकराते हुए बोलता है कि “मैं पांडवों को एक सई की नोक के बराबर भी भूमि नहीं दूंगा”। दुर्योधन के इस जवाब पर भगवान श्रीकृष्ण उठकर जाते हैं तब दुर्योधन भगवान श्रीकृष्ण को बंदी बनाने का आदेश देता है फिर भगवान अपना विराट रूप दिखाते हैं।

फिर महाभारत का युद्ध होता है और पांडव इंद्रप्रस्थ के साथ साथ पूरा हस्तिनापुर हासिल करते हैं। धर्म ग्रंथ में उलेखित इस पंक्तियों का सार इतना ही है कि युद्ध कोई नहीं चाहता है सभी शांति चाहते हैं। 

अब इस दौर में अयोध्या आंदोलन के नायक रहे स्वर्गीय डॉक्टर अशोक सिंघल जी भी महाभारत का मर्म जानते थे इसीलिए उन्होंने उस समय मुस्लिम समाज से अपिल की थी आप हिंदूओं को उनका केवल तीन स्थल “अयोध्या, मथुरा, काशी” दे दीजिए, हिंदू तीन लाख मंदिरों को तोड़कर बनाई गई मस्जिदों पर अपना दावा कभी नहीं करेगा लेकिन मुस्लिम समाज और उनके तथाकथित बुद्धिजीवी सेकुलर गिरोह ने वही काम किया जो धृतराष्ट्र की सभा में दुर्योधन ने किया कि “हम सुई के नोक के बराबर भी भूमि नहीं देंगे” 

मुस्लिम समाज और उनके पैरोकार सेकुलर हिंदू भी वही काम किया और दावा नहीं छोड़ा, उन्होंने दावा अयोध्या पर भी नहीं छोड़ा, वो दावा काशी और मथुरा पर भी नहीं छोडऩे को तैयार हैं जबकि काशी में तो प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देता है कि वो मंदिर ही है। नंदी की मूर्ति, ज्ञानवापी कुआं से लेकर के श्रृंगार गौरी माता की मंदिर तक सारे साक्ष्य उपलब्ध हैं। फिर भी मुस्लिम समाज दावा नहीं छोड़ रहा है। 

जो शांति चाहता है वह रास्ता ढूंढने का काम करता है लेकिन मुस्लिम समाज हठधर्मिता नहीं छोड़ रहा है। यही कारण है कि हिंदू समाज को सुप्रीम कोर्ट से 400 साल बाद अपने आराध्य के लिए हक लेकर आना पड़ा है। यही सब कार्य पिछले कई सालों से हिंदू समाज को अंदर ही अंदर संगठित करने का काम कर रहा था और आज हिंदू समाज संगठित हो चुका है कुछ सेकुलर हिंदुओं को छोड़कर करके। 
          जो महाभारत में भी थे जो जानते थे कि पांडव सच के साथ हैं, धर्म के मार्ग पर हैं फिर भी उन्होंने अधर्म का साथ दिया। जिनमें भीष्म पितामह, गुरु द्रोण, कृपाचार्य, महारथी कर्ण और नारायणी सेना।

जो काम भगवान श्रीकृष्ण ने धृतराष्ट्र की सभा में किया था आज वही काम हिंदू समाज कर रहा है अपना विराट रुप दिखा रहा है उसी का नतीजा है काशी के बाबा विश्वनाथ धाम में जो कोर्ट का फैसला आया है। 

 मुस्लिम समाज ने बाबा धाम के सर्वे को रोक दिया था इसीलिए कोर्ट ने कहा अब सर्वे केवल श्रृंगार गौरी मंदिर का ही नहीं बल्कि पूरे मस्जिद का भी होगा। 
         चार दिन के अंदर रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल होगा। कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया है कि पीएसी लगाकर सर्वे कराया जाए और अगर कोई सर्वे में बाधा उत्पन्न करता है तो उस पर एफआईआर दर्ज किया जाए और उसको जेल भेजा जाए। सर्वे अंदर बैरिकेडिंग हटाकर होगा। सर्वे के दौरान अगर कहीं ताला बंद है तो उसे तोड़कर सर्वे पूरा किया जाएगा। 

तो आज हिंदू समाज जागृत हो चुका है इसीलिए वह अब केवल इंद्रप्रस्थ या पांच गांव लेकर संतुष्ट नहीं होगा उसे अब पूरा हस्तिनापुर भी चाहिए और यही कारण है कि मथुरा, काशी दोनों स्थलों का केस कोर्ट में है और कुतुबमीनार से लेकर कश्मीर के मार्तंड मंदिर तक सब पर हिंदू समाज ने अपना दावा किया है। हिंदू समाज की जागृति ही है जो आपको कोर्ट लेकर जा रही है क्योंकि वहाँ युद्ध से नहीं बल्कि साक्ष्यों के बल पर हिंदू अपना हक ले रहा है। 

हिंदू जागृति का ही फल है कि आज के दौर में सेकुलर राजनीतिक दल प्रत्यक्ष रूप से हिंदू समाज के खिलाफ और मुसलमानों का खलीफा बनने की कोशिश भी नहीं कर रहा है और जिसने किया भी है उसका हश्र पिछले कई सालों से क्या है रहा है वो भी किसी से छुपा नहीं है। 

इसलिए मुस्लिम समाज और तथाकथित सेकुलर गिरोह भविष्य में इस तरह के और स्थलों के लिए तैयार रहे क्योंकि देश में तीन लाख से अधिक मंदिरों को तोड़कर मस्जिद बनाया गया है ( सुब्रमण्यम स्वामी और स्वर्गीय डाँ अशोक सिंघल जी के अनुसार)। दो मंदिर तो बनारस में ही हैं जिनको तोड़कर मस्जिद बनाया गया है। 

हिन्दू तन-मन, हिन्दू जीवन।
रग-रग हिन्दू मेरा परिचय।।

बोल डमरू वाले की जय....

 लेखक: कृष्णकांत उपाध्याय

Saturday, April 23, 2022

सिस्टम को समझने के ताजा तारीन तथ्य

लेखक: कृष्णकांत उपाध्याय

भाजपा सरकार बनाती हैं, कांग्रेस और लेफ्ट सिस्टम बनाते हैं जो उनके सत्ता में ना रहने पर भी अपना काम बखूबी कर सके और आज वही सिस्टम अपना काम कर रहा है, 
यह सिस्टम ही है जो रामनवमी और हनुमान जयंती के शोभायात्रा पर पथराव के बाद मौन हो जाता है और जैसे ही इन उपद्रवियों पर कार्यवाही होती है तो कोर्ट स्वतः संज्ञान लेते हुए रोक लगा देता है। यह सिस्टम ही है जो हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार के समय कोर्ट स्वतः संज्ञान नहीं लेता है। 
यह सिस्टम ही है जो करौली, खरगौन, जहांगीरपुरी में हिंदुओं पर हमला होने के बाद दौरा करने नहीं जाता है लेकिन जैसे ही दंगाइयों पर कार्यवाही होती है तो पंहुचना शुरू हो जाता है। ( औवैसी, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, लेफ्ट आज दौरा करने जा रहे हैं जहांगीरपुरी)इनमें से कोई भी करौली, खरगौन, लोहरदगा का दौरा नहीं किया। 
 
यह सिस्टम ही है जो हिंदुओं पर अत्याचार को मिडिया में बहस का हिस्सा नहीं बनने देता है बल्कि बहस इस पर शुरू कर देता है कि “बुलडोजर चलाना वैध या अवैध”। 
यह सिस्टम ही है जो हिंदूओं पर हुए पथराव पर सामने नहीं आता है तब सामने आता है जब पता चलता है कि शोभायात्रा की अनुमति ही नहीं ली गई है। यह सिस्टम ही है जो दिल्ली को बेवजह बंधक बनाए रखता है और कोर्ट मौन रहता है। 
यह सिस्टम ही है जो राणा अयूब जैसी पत्तलकारिता करनेवाली को देश के बाहर जाकर देश के खिलाफ बोलने के लिए आदेश दे देता है यह कहकर कि 10-12 करोड़ की चोरी कोई बड़ी चोरी नहीं होती है।

यह सिस्टम ही है जो हिंदुओं के पलायन पर मौन रहती है।
यह सिस्टम ही है जो कश्मीरी पंडितों के नरसंहार पर विधानसभा में ठहाके लगाकर मजाक उड़ाता है।
यह सिस्टम ही है जो मिडिया को दंगाइयों के साथियों का बयान चैनलों पर दिखाती है लेकिन दंगाइयों के जुल्म के शिकार हुए लोगों को चैनलों पर नहीं दिखाते हैं।
यह सिस्टम ही है जो हिंदुओं की गंगा और यमुना दोनों हैं जो पूज्यनीय हैं उन्हीं को सेक्लुरिजम के नाम पर गंगा-जमुनी तहजीब सिखाती है। यह सिस्टम ही है जो बहुत चालाकी से जयकारों(भारत माता की जय, जय श्री राम, वंदेमातरम) को नारों में तब्दील कर देती है। 

यह सिस्टम ही है जो यह बताती है कि यूपी में ब्राह्मण नाराज है लेकिन यह नहीं बताती कि मुस्लिम सपा को एकतरफा वोट कर रहे हैं जिससे हिंदुओं का वोट एकजुट हो जाए। 
यह सिस्टम ही है जो अयोग्यताओं से परिपूर्ण व्यक्तियों को पद देकर सिस्टम का हिस्सा बनाता है और अंत में यही सिस्टम हिंदू समझ नहीं पाते हैं और हिंदू का विरोध करते हैं, साथ नहीं देते हैं, आगे बढ़ने के लिए प्रेरित या सहयोग करना तो दूर उनकी टांग खिंचकर गिराते हैं, जातियों में बंटकर लड़ते हैं और कटते है।

 कल राजस्थान की कांग्रेस सरकार के कुकृत्य ने यह साबित भी कर दिया कि सिस्टम के संदर्भ में मेरा विचार सही है, कल राजस्थान के अलवर जिले में एक 300 साल पुराना शिव मंदिर तोड़ दिया गया बल्कि मंदिर तोड़ा ही नहीं गया है पहले भगवान शिव के शिवलिंग को ड्रिल मशीन से उखाड़ा गया, अन्य मूर्तियों को तोड़कर कचरे में फेका गया फिर मंदिर को तोड़ा गया। 
अलवर में शिव मंदिर तोड़ा गया - फोटो : Social Media

अब इसी घटना को देखिए और अपने विचारों के तराजू में तौलिए जहांगीरपुरी में अवैध कब्जों पर बुलडोजर चला तो सिस्टम का एक एक सैनिक अपने अपने काम पर लग गया क्योंकि वहां मामला मुसरिम का था लेकिन राजस्थान के अलवर में जो कांग्रेस सरकार ने किया उस पर सिस्टम का एक एक सैनिक शुतुरमुर्ग की तरह रेत में मुंह डालकर बैठ गया क्योंकि यहां बात हिंदुओं की थी। यह वही सिस्टम है जो मस्जिद की अवैध दीवार पर कोर्ट तक चला जाता है और शिव मंदिर को तोडऩे पर खामोश हो जाता है। यह वही सिस्टम है जो जहांगीरपुरी में अवैध कब्जे पर चले बुलडोजर पर स्वतः संज्ञान लेता है लेकिन अलवर के शिव मंदिर पर मौन है। 

यह वही सिस्टम है जो मिडिया में जहांगीरपुरी का “बुलडोजर वैध या अवैध” पर बहस कराना शुरू कर देता है लेकिन 300 साल के धरोहर के रूप में खड़े शिव मंदिर को तोड़ने पर कोई बहस नहीं होती। यह वही सिस्टम है जो जहांगीरपुरी में दौरा पर दौरा ( ओवैसी, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधि मंडल) करता है, लेकिन अलवर का 300 साल पुराना शिव मंदिर तोडें जाने पर कोई नहीं जाता।
यह वही सिस्टम है जो जहांगीरपुरी पर फेसबुक, ट्विटर, मिडिया में आकर “अल्पसंख्यकों पर अत्याचार”, “संविधान खतरे में”, “लोकतंत्र की हत्या” बताता है लेकिन 300 साल धरोहर रूपी शिव मंदिर पर सिस्टम अंधा, बहरा, लूला, लंगडा, गूंगा तक हो जाता है। 
इस सिस्टम से निपटने के लिए हर किसी को आदत डाल लेनी चाहिए। क्योंकि जब तक आप केवल सरकार बनाएंगे तब तक आप कोई भी वैचारिक लड़ाई नहीं जीत पाएंगे लेकिन जिस दिन आप सिस्टम बनाना शुरू कर देंगे उस दिन आप बड़े से बड़ा वैचारिक युद्ध जीत जाएंगे। 
वैसे भी इस सिस्टम के रहते हुए अब इस देश में किसी गजनी, खिलजी, बाबर, औरंगजेब की जरूरत नहीं है जो अयोध्या में राम मंदिर की जगह बाबरी, काशी में विश्वनाथ मंदिर की जगह ज्ञानवापी, मथुरा में जन्मस्थान से लगाकर मस्जिद खड़ी कर दे, उसके लिए इस देश का सेक्लुरिजम से ग्रसित हिंदू ही काफी हैं....!




Saturday, February 26, 2022

सत्ता के खातिर ना जाने कहा तक गिरेंगे

आज ही के दिन 2019 में "एयर स्ट्राइक" करके भारतीय वायुसेना ने पुलवामा हमले में वीरगति को प्राप्त हुए सीआरपीएफ के जवानों का बदला लिया था। 14 फरवरी को 2019 को पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने दक्षिण कश्मीर में पुलवामा के पास जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग पर सीआरपीएफ के काफिले को निशाना बनाया था, जिसमें 40 सीपीआरएफ के जवान वीरगति को प्राप्त हुए थे । यह एक आत्मघाती हमला था। इसके कुछ दिनों के बाद भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के खैबर पख्तूनवा प्रांत के बालाकोट में एक शिविर पर हवाई हमला किया था और पाक स्थित आतंकी कैंपों का खात्मा कर दिया था। यह समय था सेना के पीछे एकजुट होने का तो विपक्षी पार्टी के नेता लोग घटिया बयान देकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहे थे। 

जरा उस समय के कुछ बयानों पर गौर फरमाएं-

ममता बनर्जी -
मोदी बाबू, हमलेे के समय आप कहां थे?, आपको पहले से पता था कि यह घटना होगी। आपके पास पहले से जानकारी थी। केंद्र सरकार केेेेेेे पास इस संबंध में खुफिया जानकारी थी। फिर जवानों को उस दिन हवाई मार्ग से क्यों नहीं जानेे दिया गया? काफिले के मार्ग की नाका जांंच क्यों नहीं की गई ? जवानों को मरने केेे लिए क्यों छोड़ दिया गया ?  इसलिए कि आप चुनावों से पहलेे मामले का राजनीतिकरण करनाा चाहते थे। हमारेेे जवानों के खून का इस तरह राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। मोदी शांति के संदेशवाहक होने का नाटक करते हैं। वही उनकी पार्टी गुप्त रूप से देश में युद्ध समान परिस्थितियां पैदा करना चाहती है और दंगा करना शुरू देती है।

अरविंद केजरीवाल- देश शहीदों के गम में रो रहा था, देश गुस्से में था अपमानित महसूस कर रहा था। मंगलवार को देश ने सख्त संदेश पाकिस्तान को दिया, पर दोबारा देश की आत्मा रो पड़ी। जब देश और जवान नहीं बचेगा तो बूथ कहां से बचेगा। आखिर, चुनाव जीतने के लिए पीएम मोदी को कितनी लाशें चाहिए।

पी. चिदंबरम- भारतीय वायुसेना के वाइस एयर मार्शल ने हताहतों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया कि कोई नागरिक या सैनिक हताहत नहीं हुआ। तो, हताहतों की संख्या 300-350 किसने बताई? एक नागरिक के तौर मैं अपनी सरकार पर भरोसा करने के लिए तैयार हूं लेकिन अगर हम चाहते हैं कि दुनिया को भरोसा हो तो सरकार को विपक्ष को कोसने की बजाय इसके के लिए प्रयास करना चाहिए।

दिग्विजय सिंह- हमें हमारी सेना पर और उनकी बहादुरी पर गर्व है व संपूर्ण विश्वास हैं। किंतु पुलवामा दुर्घटना के बाद हमारी वायुसेना द्वारा की गई एयर स्ट्राइक के बाद कुछ विदेशी मीडिया में संदेह पैदा किया जा रहा है, जिससे हमारी सरकार की विश्वसनीयता पर भी प्रश्न चिह्न लग रहा है।

कपिल सिब्बल-  मोदी जी! क्या इंटरनेशनल मीडिया... न्यूयॉर्क टाइम्स, वॉशिंगटन पोस्ट, डेली टेलीग्राफ, द गार्जियन, रॉयटर्स ने बालाकोट में आतंकियों को किसी  तरह का नुकसान न होने का सुबूत दिया है? आप,आतंक का राजनीतीकरण करने के लिए दोषी हैं? 

बसपा सुप्रीमो मायावती- भाजपा अध्यक्ष अमित शाह दावा करते हैं कि एयर फोर्स की स्ट्राइक में 250 आतंकवादी मारे गए हैं लेकिन उनके गुरु जो हमेशा हर बात पर क्रेडिट लेते हैं, इस मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं।

नवजोत सिंह सिद्धू- वहां आतंकियों को मारने गए थे या पेड़ उखाड़ने। क्या  मुट्ठी भर लोगो के लिए एक पूरे देश को या किसी एक व्यक्ति को दोषी ठहराया जा सकता है। आतंकवाद का कोई देश नहीं होता , ना आतंकियों का कोई मजहब।

बीके हरिप्रसाद- पुलवामा हमले के बाद के घटनाक्रम पर यदि आप नजर डालेंगे  तो पता चलता है कि यह पीएम मोदी और पाकिस्तान के प्रधामंत्री इमरान खान के बीच मैच फिक्सिंग थी।

सपा नेता राम गोपाल यादव ने दावा किया था कि पुलवामा आतंकवादी हमला वोट हासिल करने के लिए रचा गया ‘‘षड्यंत्र'' था।

सेना के एक पूर्व अधिकारी का कहना है जब बिना जांचे-परखे न्यूज फैलाई जाती है तो उसका फायदा चीन और पाकिस्तान और उन तत्वों को होता है, जो हमारे देश को बर्बाद करना चाहते हैं।पिछले 3 साल में कई राजनीतिक दल एयर स्ट्राइक के सबूत मांग चुके हैं।

इसी तरह 2016 में जब उड़ी हमले के बाद भारतीय थल सेना ने 28 -29 सितंबर 2016 को पीओके में दाखिल होकर पाकिस्तान के कई आतंकी अड्डों को ध्वस्त किया। सेना की इस कार्रवाई में भी बड़ी संख्या में आतंकवादी मारे गए थे। बाद पाकिस्तान ने माना कि पीओके में भारतीय सेना दाखिल हुई और ऑपरेशन किए । लेकिन राहुल गांधी सहित विपक्ष के कई नेताओं ने सेना के पराक्रम पर सवाल उठाते हुए हमले के सबूत मांगे थे। सेना ने वीडियो जारी कर इन लोगो के मुंह पर झन्नाटेदार तमाचा भी मारा है।

Thursday, December 23, 2021

हाथी जितना सुस्त होगा कमल उतना ही खिलेगा।

लेखक: कृष्णकांत उपाध्याय

मैं खुद को चुनाव विशलेषक नहीं मानता, लेकिन अभी कुछ दिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर अवध और पूर्वांचल के क्षेत्रों में जाना हुआ, तो मालूम पड़ा की भाजपा वापसी कर रही है लेकिन जैसी वापसी भाजपा के लोग बता रहे हैं। भाजपा वैसी वापसी नहीं कर रही है जैसी 2017 में प्रचंड बहुमत थी, वापसी 230+ सीटों के साथ कर रही है क्योंकि तथाकथित किसान आंदोलन का खामियाजा उठाना पड़ेगा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रों में बाकी पूर्वांचल, अवध और बुंदेलखंड में भाजपा मजबूत नजर आ रही है और यहां जौनपुर और आजमगढ़ को छोड़ दें तो भाजपा हर जगह से एकतरफा निकल रही है।

भाजपा के वापसी का कारण एक नहीं अनेक प्रमुख कारण हैं जैसे-  
               
गावों में 18 घंटे बिजली का रहना, गावों तक सड़कों का जाल बिछना (कुछ क्षेत्रों को छोड़कर), कोरोना काल से ही मुफ्त राशन, लाकडाउन के समय महिलाओं के जनधन अकाउंट में तीन माह तक ₹500 तक देना, किसानों के अकाउंट में सलाना ₹6000 का वितरण, अयोध्या दिपोत्सव, अयोध्या में श्री रामजन्मभूमि का निर्माण, काशी में बाबा काशी विश्वनाथ जी का कारीडोर, मुफ्त कोरोना वैक्सीन, इत्यादि। ये सारी चीजें भाजपा को जमीनी स्तर तक पहुंचने में मदद की हैं। 

योगी आदित्यनाथ की छवि

सबसे अधिक अगर भाजपा को जमीन से जोडने का काम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बुलडोज़र चलाने वाली छवि ने कार्य किया है। 
इस सब से प्रदेश के लोगों को लगा की उत्तर प्रदेश में कोई पहला मुख्यमंत्री है जो बाहुबलियों को घुटने टेकने पर मजबूर किया है। शहर में किसी को लगे या ना लगे लेकिन गावों में लोग इससे प्रभावित हुए हैं।

विपक्ष के बयान वीरों के घातक बयान- 

भाजपा को मजबूती देने का कुछ काम तो विपक्ष में बैठे बयान वीरों ने ही किया है जैसे - अखिलेश यादव का कोरोना वैक्सीन पर दिया गया ज्ञान, अखिलेश यादव का जिन्ना के प्रति दिया गया ज्ञान भी इस कड़ी में भाजपा को आगे कर रहा है और अभी हाल ही में कई सपा नेताओं द्वारा लडकियों के शादी की उम्र को लेकर दिया गया बयान भी भाजपा को मजबूती देने का काम किया है।

इस बयान वीरों की श्रृंखला में केवल समाजवादी पार्टी के बयान वीर नहीं है बल्कि इस देश के सबसे बड़े बयान वीर माननीय श्री राहुल गांधी जी भी आगे ही हैं। उनका हिंदू और हिंदुत्व पर हर तीसरे दिन दिया जाने वाला बयान प्रियंका वाड्रा के मंदिर दर्शन और तिलक को तिरस्कृत कर रहा है। एक तरफ प्रियंका वाड्रा मंदिर में जाकर कांग्रेस को प्रदेश में तीसरे नंबर की पार्टी बनाने की कोशिश कर रही हैं तो राहुल गांधी अपने हिंदू-हिंदुत्व ज्ञान से कांग्रेस को और नीचे धकेल रहे हैं।

औवैसी फैक्टर - 

वैसे तो असुद्दीन औवैसी को विपक्ष की पार्टियां भाजपा की B टीम कहती हैं और उनका ये कहना गलत नहीं है क्योंकि औवेसी जहाँ भी चुनाव लड़ते हैं वहां मुस्लिम मतों में बिखराव कर भाजपा को मदद ही करते हैं। उदाहरण के तौर पर सबसे पहले महाराष्ट्र में एनसीपी और कांग्रेस को नुकसान पहुंचाया फिर उसके पश्चात बिहार में आरजेडी और कांग्रेस को नुकसान पहुंचाया। अब जहां मुस्लिम मतों का बिखराव होगा वहां विपक्षी पार्टियों को नुकसान तो होगा ही और यही नुकसान भाजपा को फायदा पहुंचाता है। 

बसपा का जमीनी स्तर पर कमजोर होना - 

भाजपा के जीत का आखिरी कारण और मजबूत कारण बसपा का जमीनी स्तर पर कमजोर होना है। हाथी जितना सुस्त होगा कमल उतना ही खिलेगा। क्योंकि बसपा का कोर वोटर समाजवादी पार्टी को कभी वोट नहीं करता है और ना ही कभी करेगा। इसका उदाहरण 2019 के लोकसभा चुनावों में देखा जा चुका है सपा- बसपा गठबंधन के बावजूद बसपा का कोर वोटर सपा को वोट नहीं किया और नतीजा सपा अपने घर की सीटें भी हार गई। बसपा के न जीतने की स्थिति में बसपा के वोटर भाजपा को वोट करेंगे और भाजपा मजबूत होती जाएगी...

ऐसा नहीं है कि सपा मजबूत नहीं है लेकिन अभी की सपा कमजोर हो गई है। 2012 में जब सपा प्रचंड बहुमत से सरकार में आई थी तो वो वक्त अलग था। उस समय मुलायम सिंह यादव, आजम खां, शिवपाल सिंह यादव, रामगोपाल यादव जैसे नेता का जमीन पर पकड़ और अपने मतों को जोड़े रखने की राजनीतिक कौशल मजबूत थी। उस समय नरेन्द्र मोदी गुजरात से बाहर नहीं निकले थे। नरेन्द्र मोदी का लहर नहीं था। उस समय योगी आदित्यनाथ जी का प्रदेश राजनीति में जन्म नहीं हुआ था वो एक लोकसभा और आस पास तक ही सीमित थे। लेकिन आज अखिलेश यादव अकेले हैं ना मुलायम सिंह यादव सक्रिय हैं ना आजम खां जो अपने पारम्परिक मतों के बिखराव को रोक लें। शिवपाल सिंह यादव का दल तो अखिलेश यादव से मिल गया लेकिन दिल मिलने में वक्त लगेगा क्योंकि ये चुनावी मिलन है पारिवारिक मिलन नहीं और इसीलिए दल मिले हैं दिल नहीं। और जब तक दिल मिलेंगे तब तक देर हो गई होगी....

बाकी समय का इंतजार करें। 

( लेखक  इलहाबाद विश्वविद्यालय से आधुनिक इतिहास एंव हिंदी विषयों में स्नातक और महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से शिक्षा शास्त्र में स्नातक हैं। हिन्दी एंव शिक्षाशास्त्र से परास्नातक किया हैं।)