विद्रोही जो स्वर्ग की सत्ता के विरुद्ध,
उंगली पर पर्वत उठाए खड़ा हो गया था।
विद्रोही जो कंश के अत्याचारों के विरुद्ध
उसके ही नगर में जाकर खड़ा हो गया था।
विद्रोही जो स्त्रियों की मुक्ति के लिए
जरासंध के विरुद्ध खड़ा हो गया था।
विद्रोही जो स्त्री के सम्मान के लिए
कुरु साम्राज्य के विरुद्ध खड़ा हो गया था।
विद्रोही जो प्रेम के लिए सामाजिक
रूढियों के विरुद्ध खड़ा हो गया था।
विद्रोही जो मटकियां फोड़ता था
नगर जाते गांव के दुग्ध को रोकने के लिए।
विद्रोही नही जाते हैं वन में
वर्षों तप करके किसी
रहस्य को जानने के लिए
विद्रोही समाज मे रहकर ही ख
ड़े हो जाते हैं उसके सुधार के लिए।