Showing posts with label वामपंथ. Show all posts
Showing posts with label वामपंथ. Show all posts

Tuesday, August 1, 2023

क्या सिर्फ़ सत्ता के लिए राष्ट्र-खंडन भी मान्य हैं?

देश में हो रहे आए दिन दंगे इस बात के प्रत्यक्ष प्रमाण है की लड़ भिड़कर कर ही सही सत्ता कैसे हासिल की जाय? साल 2014 में जब स्वाभिमानी हिंदुओ के हाथ में सत्ता आई थी तब लगा था 800 साल बाद देश पहली बार राहत की सांस ले रहा है। ले भी क्यों ना आए दिन हो रहे है बॉम्ब विस्फोटों से छुटकारा जो मिल गया। वरना कभी हैदराबाद तो कभी बनारस तो कभी बंगलौर से मुम्बई तक दशहत के साए में जी रहा था। हजारों लोगो को अपनी जिंदगी से हाथ धोना पड़ा और ना जाने कितने मासूमों की जिंदगी नरक से भी बत्तर हो गई थी। इस्लामिक जिहाद का परचम बुलंद था कभी भी कोई भी घटना सुनने को मिल जाती थी 2014 से पहले तक।
हौसले बुलंद तो पशुपति से तिरुपति तक फैले लाल सलाम वालो का भी था। आए दिन नक्सलियों का आतंक देखने को मिल ही जाता था। 2014 से पहले स्थिति बहुत भयावह थी।2014 के बाद इन सबने अपने योजनाओं में बहुत बदलाव किया। जिस काम को ये पहले खुलकर हथियारों के दम पर अंजाम देते थे उसमे बदलाव करते हुए इन्होंने आंदोलनों का सहारा लिया। मोदी जी के प्रधामंत्री बनते ही इस्लामिक जिहादियों की कब्र खुदनी शुरू हो गई थी और नक्सलवाद की कमर टूट गई।

 लाल जाल में ज्यादतर युवा वर्ग ही फंसता है। कॉलेज और विश्वविद्यालयो में ही ब्रेन वाश की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। फरवरी 2016 में जेएनयू में "आजादी आजादी" के नारे लगना एक जीता जागता उदाहरण है। वामपंथी कन्हैया अब कांग्रेस में है खैर क्या फर्क पड़ता है वामी लोग कांग्रेस के जूठन पर ही तो पलते है। इस्लामिक जिहादी कहा शांत बैठने वाले थे उन्होंने ने भी नारा लगा गया " भारत तेरे टुकड़े होंगे इंशा अल्लाह" देश की न्यायिक व्यवस्था को चलाने वाले तथकतिथ साहब लोगो को भी नही छोड़ा गया "अफजल हम शर्मिंदा है तेरे कातिल जिंदा है"... वाह क्या खूब उमर खालिद सबका नेता बनकर निकल गया पूरा विपक्ष इन्हे अपने सर पर चढ़ा लिया था। कुछ मुठ्ठी भर छात्रों और वामपंथी संगठनों ने विश्वविद्यालय की कीर्ति एवं शिक्षा के स्तर पर ऐसे आघात किए जिनको देशभक्ति के श्रेणी में तो कत्तई नहीं रखा जा सकता।जिस समय सारा देश सियाचिन के जांबाज शहीदों को श्रद्धांजलि दे रहा था उस समय जेएनयू में "भारत की बर्बादी तक जंग रहेगी जंग रहेगी" तथा "अफजल हम शर्मिंदा हैं तेरे कातिल जिंदा है के नारे लग रहे थे।" आतंकी अफजल गुरु की बरसी मनाई जा रही थी । वहां पोस्टर लगे जहां जिनमें लिखा था - शहीद अफजल गुरु की शहादत की पहली बरसी पर स्मृति सभा जिसमें अरुंधती राय, प्रो. जगमोहन , सुजितो भद्र , जेएनयू के प्रो. एके रामकृष्णन के नाम भाषण देने वालों थे। डीएसयू के पोस्टरों में छापा गया कि कश्मीर के राष्ट्रीय मुक्ति संघर्ष को लाल सलाम। देश की एकता और अखंडता को खुलेआम चुनौती दी जा रही थी। जहां कहीं भी देश में भारतीय सेना के विरुद्ध विद्रोही गतिविधियां हैं उन सब के समर्थन में जेएनयू में सेमिनार एवं प्रदर्शन आयोजित हो किए जाते रहे है विभिन्न संगठनों द्वारा। कश्मीर, असम ,मणिपुर और नागालैंड के विद्रोह संगठनों की उपस्थिति देखी जा सकती है।

 जो काम हथियारों और बंदूकों से नहीं हुआ उसे आसानी से "कलम" से अंजाम दिया जाने लगा है। सड़क पर निकल हल्ला मचाकर बवाल काटने वाली वाली राजनीति तो इनका प्रमुख हिस्सा है। पत्थरबाजी की घटनाएं कश्मीर में आम बात हो गई थी। महिलाएं बच्चे सब शामिल थे इसमें। नौजवानों को तथाकथित वरिष्ठ सेकुलर पत्रकार लोग भटका हुआ बताने लगे थे। हद तो तब हो गई थी जब बुरहान बानी के एनकाउंटर होने पर उसे ये लोग हीरो बना दिए थे। 2016 में उड़ी हमला हो या 2019 का पुलावामा कांड कौन भुला सकता है जिसका मुंहतोड़ जवाब हमारी देश सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक करके लिया था। अब देखिए इसमें फेक नैरेटिव कैसे गढ़ा गया? सर्जिकल स्ट्राइक को फर्जिकल स्ट्राइक बोला गया विपक्ष द्वारा और एयर स्ट्राइक पर इन्होंने कहा कौवा चिड़िया मार पेड़ को मारा गया है...! मतलब मोदी विरोध में अपने ही देश के सेना पर सवाल खड़े कर दिया था इन लोगों ने। सुरक्षाबलो पर बलात्कार का आरोप लगाना हो या बीएसएफ जवान का पतली दाल वाला नौटंकी सब साजिश का हिस्सा था। पूरी छवि बिगाड़ने की कोशिश की गई थी लेकिन पुलावामा हमले के बाद वही सीआरपीएफ के जवान इनके लिए राजनीतिक मुद्दा बन जाते है। लेकिन कोई गजवा ए हिंद फैलाने वाले मकसद से किए गए हमले की आलोचना नही करता है। पुरे विपक्ष में किसी नेे भी इस्लामिक   जिहाद या आतंकवाद के खिलाफ एक शब्द नही बोला..!

 2019 में सरकार बनते ही मोदी सरकार ने सबसे पहले तीन तलाक,फिर अगस्त में अनुच्छेद 370 और 35ए को हटा दिया और राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ  जो सरकार के प्रमुख एजेंडो में से एक था। नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019, बोडो समझौता  हो या ब्रू-रियांग समझौता सबमें सरकार को सफलता मिली। एक तरफ देश विरोधी एजेंडा जोर शोर से चल रहा था दूसरी तरफ से मोदी सरकार देशहित अपने सारे फैसले लेती रही।  बाकी 2019 अगस्त में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाए जाने पर पीडीपी के दो सांसदों नजीर अहमद लवे और एमएम फैयाज़ ने संसद में ही अपने कपड़े फाड़ दिए थे। पीडीपी के सांसदों द्वारा संसद में कपड़े फाड़ने पर सभापति वेंकैया नायडू ने दोनों सांसदों को सदन से बाहर भेज दिया था। इतना ही नहीं इन दोनों ने संविधान की प्रतिलिपि को भी फाड़ दिया था। एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 की कॉपी फाड़ दी थी इसको लेकर काफी हंगामा हुआ था। 
 नागरिकता संशोधन अधिनियम से शुरू हुआ इस्लामिक जिहादियों और तथाकथित वामपंथियों का घिनौना खेल। सड़क पर उतर कर गंध मचाने की होड़ मची हुई थी । यूपी में तो योगी आदित्यनाथ थे जो बुल्डोजर तैयार रखे हुए थे इसीलिए यहां मामला थम सा गया। लेकिन कृषि कानून को लेकर सड़क से लेकर संसद तक मचा भसड़ लालकिले पर खालिस्तानी झंडा टांग कर खतम हुआ। कांग्रेस और पूरा बस मोदी को हटाने में लगा हुआ हैं। चाहे जैसे बन पड़े उसके लिए चीन की ही सहायता क्यों न लेनी पड़ी? भारत चीन सीमा विवाद पर इनके नेताओ के बयान सुने जा सकते है। यहां भी इन्होंने ने सिर्फ जहर ही उगला है  सेना के जवानों के लिए। उस समय के सीडीएस जनरल बिपिन रावत को सड़क का गुंडा  तक बोल दिया जाता है। अग्निवीर मामले में ही देख लीजिए कुछ बचा है ही नही बताने और समझाने के लिए। जंगल में बंदूक चलाने वाले अब धरने में शामिल होते है क्योंकि जानते है इस सरकार में बंदूक उठाए तो ढेर कर दिए जाएंगे। इसीलिए कलम को हथियार की तरह इस्तेमाल करने लगे है विदेशी मीडिया में बैठकर यही भारत विरोधी एजेंडा जोर शोर से चला रहे है। जो समाचार पत्रों के माध्यम से अपने विचारो द्वारा जहर घोल रहे है वो बहुत खतरनाक हैं। सरकार को भी चाहिए इन लोगो के खिलाफ आवश्यक करवाई करे। इन सबमें सरकार कही ना कही पूरी तरह सफल नही हो पाई है यहां ध्यान से वरना घातक सिद्ध होगा।

Saturday, February 20, 2021

देश विरोधी तत्वों से सावधान रहे

अरे लगता है ये उलुल - जुलुल बयान देने वाले सुधरेंगे नहीं। बिना सोचे समझे जो मन में आता है वहीं बक देते है। फिर वो देश के पूर्व प्रधामंत्री राजीव गांधी की हत्या को लेकर ही क्यों न हो। इनका पुत्र कहता है "मैं अपने पिता के हत्यारो को माफ करता हूं।" सत्ता पाने के लिए ये लोग न जाने कितना गिरेंगे। खैर इन महाशय को एक बात पता होना चाहिए कि वो भारत के प्रधानमंत्री थे जिनके कंधों पर राष्ट्र का भार सौंपा गया था भारत के नागरिकों  द्वारा। अतः  उनकी हत्या देश के लोकतंत्र की हत्या थी। मूर्खो को यह बात जितनी जल्दी समझ में आ जाए उतना ही बढ़िया  है कि देश तोड़ने वाले मृत्युदंड के पात्र है माफी के नहीं। 
पिछले महीने तथाकथित किसान आंदोलन के दौरान एक खालिस्तानी समर्थक कह रहा था जनरल वैद्य को ठोक दिए, इंदिरा गांधी को ठोक दिए ये मोदी क्या चीज है? आंदोलन के नाम पर यही उलुल - जुलुल दुष्प्रचार किया जा रहा है। देश के प्रधानमंत्री की हत्या की साजिश रची जा रही है! इसको लेकर  सतर्क रहने कि जरुरत है।

भारत माता की जय और वन्देमातरम के नारों से चिढ़ने वाले लोग अपने घटिया बयानबाजी से बाज नहीं आते है। जो धरा इनका पालन पोषण करती है उसी के साथ ये तथाकथित विदेशी  विचारधारा से प्रेरित लोग विश्वासघात करते है। माता का दूध पीने नाम पर छाती में दात गड़ाकर खून पीने को तत्पर इन दुष्टों का सर्वनाश करना बेहद जरूरी हो गया है। इनके समर्थन में जितने लोग आते है सबके ऊपर उचित कार्रवाई करनी चाहिए सरकार द्वारा। देश को तोड़ने वाली आवाजे जो विश्वविद्यालयो में  बैठे विदेशी विचारधारा से प्रेरित वामपंथी उठा रहे है जिसे क्रांति का नाम दिया जा रहा है, बहुत खतरनाक एवं घातक है। जीभ काट लेनी चाहिए इनकी ताकि कोई ऐसा दुस्साहस न कर सके। भारतीय छात्र जो इस विदेशी विचारधारा से प्रेरित है उन्हे अपने सुनहरे भविष्य को देखते इसका त्याग करना चाहिए अन्यथा परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहे।
 संकीर्ण मानसिकता वाले से  उचित दूरी बनाकर रखने कि आवश्यकता है। ये पूरी कोशिश करते है सबको अपने जाल में फसाने की। इनका काम लोगो भटकाना और भड़काना रहता है ताकि किसी तरह इनकी घटिया राजनीति चलती रहे।
 इनके साथ वाद- विवाद में पड़ना ही नहीं चाहिए। ये अपना स्तर इतना नीचे गिरा देते है कि सामने वाले को मूर्ख और अपने को विद्वान बताने लग जाते है। ये वही लोग है जो सरकार का  विरोध करते - करते  देश विरोधी बाते करने लग जाते है। इनके साथ बहस करके ज्ञानी व्यक्ति भी मूर्ख सिद्ध हो जाता है। देश तोड़ने वाले लोगो के खिलाफ आवाज उठाने की जरूरत है नहीं तो आने वाली बर्बादी को कोई रोक नहीं सकता और अखण्ड भारत का उद्देश्य मात्र एक स्वप्न बनकर रह जाएगा।

Thursday, September 17, 2020

जो भी राष्ट्रहित में बाधक हो उसका सर्वनाश करो

                लेखक - शिवम् कुमार पाण्डेय

राष्ट्रहित से बढ़कर कोई कुछ नहीं होना चाहिए। राजनीतिक दल सत्ता हासिल करने के लिए किसी भी हद तक गिर सकते है  इस बात इतिहास साक्षी रहा है। चाहे वो जातिवाद की राजनीति हो या मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति कोई किसी से कम नहीं रहा है। सबने एक दूसरे को बराबर को टक्कर दी है चाहे वो कांग्रेस हो सपा हो , बसपा , आरजेडी   या कम्युनिस्ट पार्टी हो। देश को तोड़ने की बात करने वाले नक्सलियों को क्रांतिकारी तक बता दिया जाता है जिनका काम सिर्फ दूसरों को लूट मार कर खाने का है।  लाल सलाम के नाम पर ना जाने कितने निर्दोष लोगो को अपने जान से हाथ धोना पड़ा है। इस्लामिक  कट्टरपंथी जिहादियों का भी एक ही लक्ष्य है "गज़वा ए हिन्द" जिसके नाम पर ना जाने कितने बेकसूर मासूम कश्मीरी पंडितों  को जम्मू और कश्मीर में अपने घर से बेघर होना पड़ा है। घर फूंक दिया गया , मां - बहनों की इज्जत लूटी गई जिहाद के नाम पर। साफ साफ पोस्टर पर लिखा था हिन्दुओं घर छोड़ दो अपनी जान की सलामती चाहते हो तो अपने घर की महिलाओं को हमारे हवाले कर दो। 

वर्ष 2016 फ़रवरी में जेएनयू में लगे नारों को भला कौन भूल सकता है। कुछ मुठ्ठी भर छात्रों और वामपंथी संगठनों ने विश्वविद्यालय की कीर्ति एवं शिक्षा के स्तर पर ऐसे आघात किए जिनको देशभक्ति के श्रेणी में तो कत्तई नहीं रखा जा सकता।जिस समय सारा देश सियाचिन के जांबाज शहीदों को श्रद्धांजलि दे रहा था उस समय जेएनयू में भारत की बर्बादी तक जंग रहेगी जंग रहेगी तथा अफजल हम शर्मिंदा हैं तेरे कातिल जिंदा है के नारे लग रहे थे। आतंकी अफजल गुरु की बरसी मनाई जा रही थी । वहां पोस्टर लगे जहां जिनमें लिखा था - शहीद अफजल गुरु की शहादत की पहली बरसी पर स्मृति सभा जिसमें अरुंधती राय, प्रो. जगमोहन , सुजितो भद्र , जेएनयू  के प्रो. एके रामकृष्णन के नाम भाषण देने वालों थे। डीएसयू के पोस्टरों में छापा गया कि कश्मीर के राष्ट्रीय मुक्ति संघर्ष को लाल सलाम। देश की एकता और अखंडता को खुलेआम चुनौती दी जा रही थी। जहां कहीं भी देश में भारतीय सेना के विरुद्ध विद्रोही गतिविधियां हैं उन सब के समर्थन में जेएनयू में सेमिनार एवं प्रदर्शन आयोजित हो किए जाते रहे है विभिन्न संगठनों द्वारा। कश्मीर, असम ,मणिपुर और नागालैंड के विद्रोह संगठनों की उपस्थिति देखी जा सकती है। 

"भारत तेरे टुकड़े होंगे इंशाह अल्लाह इंशाह अल्लाह ,तुम कितने अफजल मारोगे हर घर से अफजल निकलेगा" अर्थात अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर देशी विरोधी नारे लगाना और आतंकियों के एनकाऊंटर  पर मानव अधिकार की बाते करने वालो को तमाम राजनीतिक दलों का समर्थन प्राप्त था। एक तरफ भारतीय सैन्य बलों के जवानों पर पत्थबाजी होती थी जिसका जवाब चाहकर की भी हमारे जवान गोली से नहीं दे सकते थे और दूसरी तरफ ये तथाकथित सेक्युलर लोग इनपर कश्मीर में बलात्कार करने का आरोप लगाते थे। पूरी तरह से भारतीय सेना का मनोबल गिराने की नाकाम कोशिश की गई। जिस छाती से दूध पिया उसी में दांत गड़ाने का काम किया इन लोगो ने। इन देशद्रोहियों की भगत सिंह से की जा रही थी! करने वाले कांग्रेसी नेता थे जिनको को तो चुल्लू भर पानी में जाकर डूब मरना चाहिए। तनिक भी शर्म ना आयी की भगत सिंह की आत्मा क्या सोच रही होगी कि कैसे निकम्में लोग पैदा हो गए है देश में यानी सत्ता के लिए कुछ भी कर बैठेंगे। मार्क्स माओ स्टालिन लेनिन चे ग्वेरा और कस्त्रो ना जाने कितने विदेशियों को अपना आदर्श मानने वाले वामपंथियों ने नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को भी नहीं छोड़ा है।

उड़ी हमले में शहीद हुए जवानों पर भी गंदी राजनीति करने से कुछ लोग बाज नहीं आए। सेना के जवानों कहा जाता था कि "ये घूस देके भर्ती हुए है"। जब भारतीय सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक करके आतंकियों को 72हुरो के पास पहुंचाकर अपने साथी जवानों का बदला लिया और ये दिखाया की हम घर में घुस कर मार सकते है तो इसको भी तमाम विपक्षी नेताओ ने मानने से इंकार कर दिया। सबको सबूत चाहने लगा था सेना के बहादुरी का हद तो तब हो गई जब राहुल गांधी ने कहा मोदी सेना के जवानों की खून की दलाली करते है।

 पिछले साल 14 फरवरी 2019 का ही मामला देख लीजिए  सीआरपीएफ के जवानों पर कायरतापूर्ण हमला हुआ था जिहाद के नाम पर जिसमें करीब 45 जवान शहीद हो गए थे। वायुसेना ने 26 फ़रवरी 2019 को एयर स्ट्राइक से इसका बदला लिया था जिसपर तथाकथित सेक्युलर लिबरल गैंग ने सवाल खड़ा कर दिया था। शुक्र है कि 5 अगस्त 2019 को संसद में माननीय गृहमंत्री अमित शाह ने धारा 370 और 35अ निष्क्रिय करने का बिल पारित कर दिया जिसे लेकर सालो से  अटकलें लगाई जा रही थी कि संघ और भाजपा सिर्फ बाते करती है इनके बस का कुछ नहीं है। अलगादवादी , हुरियत, नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी वाले कहते थे 370 हटा तो आग लगा देंगे , तबाही मचा देंगे आदि उलुल- जुलूल भाषणों से वहां की अवाम और युवाओं को बरगलाने और भड़काने का काम करते थे। 370 हटा हम सब ने देखा और इतिहास के स्वर्णिम अक्षरों में से लिखा गया। जब से 370 हटा तब से आप देख सकते हैं जन्नत जाने वालों की लंबी लाइन लगी हुई है। हुर्रियत और अलगाववादी नेताओं की तो कमर तोड़ दी गई है। 

नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 ने यो ये जता दिया कि राष्ट्रहित में फैसले लेने से भाजपा सरकार तनिक भी संकोच नहीं करेगी। इसका भी विरोध हुआ समुदाय विशेष के लोगों ने दंगा करने की कोशिश की, देश का माहौल खराब किया गया। तमाम राजनैतिक पार्टियों को घिनौना चरित्र उजगार हुआ। सेक्युलर पत्रकारों , लिबरल बुद्धिजीवियों और वामपंथी संघठनो ने आग में पेट्रोल डालने का कार्य किया। शाहीन बाग इसका जीता जागता उदाहरण है। 

अयोध्या में श्री राम मंदिर निर्माण हो रहा है काफी लंबे सालो के बाद हिन्दुओं की आस्था को न्याय मिला। उत्तर प्रदेश के मुख्मंत्री भी "हिन्दू ह्रदय सम्राट" योगी आदित्यनाथ है। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को भुलाया नहीं जा आखिर इन्हीं कार्यकाल में विवादित बाबरी ढांचा गिराया गया था। इन्होंने अपने राजनीति करियर दांव पर लगा दिया सिर्फ प्रभु श्री राम के लिए।आडवाणी , अशोक सिंघल , पूर्व प्रधान अटल बिहारी वाजपेई जी, देवी ऋतंभरा आदि लोगो के बिना ये आंदोलन संभव भी नहीं था। प्रधानमंत्री नरेन्द मोदी ने 56 इंची सीने जोर दिखाया जिसका पूरे विश्व में गूंजा उठा। बहुत पहले नारा लगाया गया था "मिले मुलायम काशीराम हवा में उड़ गए जय श्रीराम" वर्तमान में इसका सटीक उत्तर ये है "अजर अमर है जय श्री राम   मर गए मुल्ला काशीराम" । जैसी करनी वैसी भरनी जो आप करेंगे उसका दंश तो भोगना ही पड़ेगा। कारसेवकों के ऊपर गोलियां चलवाने से आप कौन से बड़का सेक्युलर बन गए! कांग्रेसियों कारामात को भी कोई नहीं भूल सकता ये तो हिन्दुओं को आतंकवादी बनाने लगे हुए थे "भगवा आतंकवाद" की संज्ञा देने लगे थे। साल 2008 में जिहाद के नाम पर होने वाले जगह जगह बम विस्फोटों को कौन भूल सकता है। सबसे महत्वपूर्ण 26/11 का मुंबई हमला जिसने पूरे देश को दहला दिया था। अभी वर्तमान में  देखिए कांग्रेसियों की करास्तनी राम मंदिर में लगने वाने गुलाबी पत्थराें के खनन पर राजस्थान सरकार ने रोक लगाा कर 25 ट्रक जप्त कर लिया। मतलब इन कांग्रेसियों  की बुद्धि अभी तक खुली नहीं है। खैर अंत में बस यही कहना चाहूंगा जो कोई भी राष्ट्रहित के मार्ग में बाधक होगा उसका सर्वनाश हो जाएगा।