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Wednesday, July 7, 2021

इस्लामिक कट्टरपंथियों को मुंहतोड़ जवाब देना जरूरी है

बहुत दिनों से लिखने का कुछ मन ही नही कर रहा था क्या लिखूं क्या नही लिखूं? बड़ा ही गजब का माहौल चल रहा है देश में। श्रीराम को काल्पनिक कहने वाले उन्हे न्याय दिलाने का झूठा ढकोसला करने लगे है।  तरह-तरह के प्रपंच रचे जा रहे है। सत्ता की तड़प इतनी है कि राष्ट्र की एकता और अखंडता को तहस नहस करने की साजिश रची जा रही है। देश के विकास मार्ग में बाधा बन रहे शत्रुओं का विनाश जरूरी हो गया है। आखिर कब तक भारत विरोधी एजेंडा चलता रहेगा और मौन होकर देखते रहेंगे? कोई आदिल आदित्य बनकर लव जिहाद करता है हिंदू लड़कियों की जिंदगी बर्बाद हो जाती है इसके खिलाफ किसी ने बोला तो पूरा विपक्ष हाय हाय करके लोकतंत्र की दुहाई देने लग जाता है और सेक्युलरिज्म का ढोंग रचता है। इन तथाकथित लोगो को एक लड़की की इज्जत नहीं दिखती है ये सिर्फ अपना मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति करने में लगे हुए है। धर्मांतरण का नंगा नाच चल रहा है जहा हिन्दू लड़कियों के साथ आए दिन लव जिहाद हो रहा है। पहले नाम छिपाकर शादी की जाती है और बाद में जबरन इस्लाम कबूल करवाया जाता है।
मदरसों में क्या कम धूमगजड़ मची है वहा तो आए दिन खबर निकलती है की 45 साल मौलवी ने 12 साल के बच्चे या बच्चियों का रेप किया। यह कैसी मजहबी  शिक्षा दी जा रही है मदरसो में जहा ये  हैवान मासूमों की जिंदगी बर्बाद कर रहे है। यहां कोई लिबरल क्रांतकारी पत्रकार  क्यों नही दिख रहे है ? क्यों नही इनकी सच्चाई दुनिया के सामने ला रहे है? वैसे देखा जाय तो मदरसों में बम बनाने ट्रेनिंग दी जाती है। सांप्रदायिक शिक्षा के नाम पर देशभर में संचालित मदरसे केवल अपनी कट्टरवादी तालीम के लिए ही बदनाम नहीं है, बल्कि हिंसक गतिविधियों एवं विस्फोटक सामग्री के भंडारण केंद्र होने के आरोप पहले भी मदरसों पर लगते रहे हैं। खबरों में सत्य तो दिख ही जाता है जब बम बनाते हुए मदरसे में ब्लास्ट हो जाता है जिसकी गूंज सबको सुनाई और चीथड़ो में पड़ी जिहादियो की लाश दिखाई देती है और । इन अवैध प्रयोगशालाओं के ऊपर जितना जल्दी हो  प्रतिबंध लगा देना चाहिए सरकार को  नही तो ये इसी तरह की आतंकी गतिविधियों को अंजाम देते रहेंगे।

वहा कश्मीर में बैठा अब्दुल गजवा ए हिन्द की साजिश रचता है। रेहड़ी लगाने वाला अब्दुल खुद को बॉम्ब से उड़ा देने का
दम भरता है क्योंकि उसे यकीन है कि मरने के बाद  जन्नत नसीब होगी और बहत्तर हूरो से मुलाकात। अब्दुल का लड़का भी इसी नक्शे कदम पर चलता है और इनका जो लीडर होता है वातानुकूलित कमरे में बैठकर मजा लेते है। इनके बच्चे विदेश घूमते है और अब्दुल का लड़का सड़क पर पंचर ही बनाता है जिन्दगी भर जबतक उसे आका का फरमान ना आ जाय की कुर्बनी देनी है। अब्दुल जिहाद करता है उसके जीवन का एक ही मकसद है सिर्फ जिहाद और जिहाद! कहा जाता है की आतंकवाद का कोई धर्म या मजहब नहीं होता है तो फिर आंतकियो को मरने के बाद दफनाया क्यों जाता है ? क्या इनको समुद्र में नही फेंक देना चाहिए ताकि ये जलजीवो का निवाला बन सके ! 

 जब से अनुच्छेद 370 और 35A निष्क्रिय हुआ है जम्मू कश्मीर में तब से कुछ लोगो का दुकान ही बंद हो गया है। ऐसा लग रहा है कि भूखों मर रहे है और कोई पानी तक ना दे रहा है इनको। कुछ दो कौड़ी के नेता 370 को वापस लागू करने की बात करते है जिसकी जितनी कड़ी भर्त्सना की जाए कम है। सिर्फ निंदा करने से कुछ नही होगा इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए । कुछ तो ऐसे है जो चीन की मदद से 370 की बहाली की बात कर रहे थे क्या ऐसे लोगो का मुंह नही तोड़ देना चाहिए? कुछ रद्दी लोग 370 को रद्द करने से नाराज है और पाकिस्तान से बात करने की बाते करते है। इनकी छटपटाहट साफ देखी जा सकती है जो लूट मचाकर रखा था इन लोगो सब बंद हो गया। पत्थरबाजी और आगजनी कश्मीर में खुलेआम होती थी सुरक्षा बलो पर और हाथ में राइफल होते हुए भी जवान पत्थर का जवाब गोली से नहीं दे सकता था। पत्थरबाजो को भटका हुआ नौजवान कहा जाता था जो पैसे लेकर ये सब करते थे। जब से 370 हटा है इन पत्थरबाज जिहादियों नामो निशान मिट गया है।तथाकथित लेफ्ट विंग मीडिया ,पत्रकार और विपक्ष के नेताओ ने कोई कसर नही छोड़ी है भारत और भारतीय सेना को बदनाम करने में। क्या-क्या आरोप नही लगा सुरक्षा बलो और सेना के जवानों पर कोई हत्यारा कहता तो कोई बलात्कारी। चुल्लू भर पानी डूब मरना चाहिए ऐसे नीच लोगो को जो देश के रक्षकों के ऊपर सवाल उठाते रहे है ऐसे लोगो के जीने का कोई अधिकार नही है।

सांप फुफकार रहा है तो उसके फन कुचल देना चाहिए वरना ऐसा विष फैलेगा की सांस लेने का भी वक्त नही मिलेगा और प्राण पखेरू उड़ जायेंगे। जैसे तो तैसा करने में ही भलाई है। बहुत हो चुकी है शांति और अमन की आशा वाली बाते। जो बोली से नही सुधरेगा उसे गोली से जवाब से देना चाहिए।

Wednesday, October 28, 2020

झण्डे पे झंडा दे मारो डंडा।

लेखक:- शिवम कुमार पाण्डेय

क्या हुआ? शोर काहे मचा रहे हो? अरे भैया वो देखो तब पूछना शोर काहे मचा रहे है? अरे ई तो गजब हो रहा है पाकिस्तान जिंदाबाद का नारा लग रहा है। कवनो चीन का समर्थन करने कि बात कर रहा है। ध्यान से सुनिए का - का कह रहा है? कहेगा का वही 370 जो बेहूदगी से भरा हुआ था उसी की बहाली की बात कर रहा है। कह रहा है चीन हमारी मदद कर सकता है 370 की वापसी में और हम चीन का समर्थन करते है। मतलब चीन आक्रमण करके कश्मीर को कब्जा में लेले..लगता है पगला गया है अभी चीन को गलवान में मुंह की खानी पड़ी थी। क्या कर सकते है रसरी जल गया पर बल नहीं गया है। वाह रे! देश विरोधी नारे और बयान देकर कह रहा है हम कश्मीर के लोगो को न्याय दिलाने की बात कर रहे हैं। एक महिला नेता भी नजर आ रही है अरे! ये तो सीधा देश के आन बान और शान पर हमला कर रही है यानी तिरंगा पर। ये तो वही है जो कभी तिरंगा को जलाने की बात करती है तो कभी खून से भिगोने की। इहा तो लाल सलाम वाले भी खड़े है वाह का बात है धर्म को अफीम का नशा कहने वाले अब इस्लामिक जिहादियों के साथ गठबंधन कय लिए है। खैर लाल सलाम के नाम धरती को खून से रंगने की साज़िश तो इनकी भी जोर शोर से चल रही है। एक दो नहीं पूरे ६ दलो गठबंधन है 370 की वापसी इनका मकसद है जो कभी पूरा नहीं होगा।
गला फाड़ - फाड़ कर ये लोग भारत को भारत में ही गाली दे रहे है और नागरिक भी भारत के फिर भी तथाकथित बुद्धिजीवी वर्ग कहता है यहां अभिव्यक्ति की आज़ादी नहीं है ! कितना शर्मनाक है जब सरकार ऐसे लोगो पर कार्यवाही करती है पूरा विपक्ष इकट्ठा हो जाता है इनका बचाव करने के लिए। संसद में बवाल खड़ा कर दिया जाता है मानो संसद पर हुआ आतंकवादी हमला  किसी को याद ही नहीं। अरे याद तो सबकुछ रहता है तभी तो आतंकियों की बरसी मनाई जाती है इन तथाकथित लोगो द्वारा। 

कश्मीर अगर धरती का स्वर्ग बताया जाता है पर इस्लामिक आतंकियों और जिहादियों ने जो तबाही मचाई है यहां उसका जिक्र कर दिया जाय तमाम बुद्धिजीवियों   सेक्युलर पत्रकारों और नेताओं को मिर्ची लग जाती हैं। वो आपको सांप्रदायिक बताते हुए कट्टर , जाहिल ,अनपढ़ मूर्ख और धार्मिक हिंसा का समर्थक की संज्ञा देने लग जाएंगे। एक पत्रकार ऐसा भी है देश में जो आपको अंधभक्त और फट्टू संघी भी बोलेगा। पर तिरंगा विरोधी बयानों पर चुप बैठ जाते है सब के सब मानो तिरंगा तो बस तीन रंगों में रंगा हुआ मामूली सा कपड़ा है। हर मुद्दे को लेकर खुद को देश की आवाज़ कहने वाले तथाकथित सेक्युलर लिबरल बुद्धिजीवी न जाने कहां खो जाते है जब देश कि इज्जत से कोई खिलवाड़ करने कि कोशिश करता है। खैर देश कि जनता समझदार है इन लोगो के बहकावे मे आने वाली नहीं है। सरकार और सुप्रीम कोर्ट को भी चाहिए  ऐसे लोगो के राजनीतिक पार्टी और इनके ऊपर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दे बाकी सब अपने आप ठीक हो जाएगा । 
आखिर कब तक ऐसे गद्दारों को खुली हवा में सांस लेने के लिए छोड़ा जाए? बात देश के सम्मान की है कोई भी ऐरा- गैरा कुछ भी कह के आसानी नहीं बच सकता है। बात साफ है अगर इस देश मे अगर किसी सांसद या मुख्यमंत्री तो "तू" कहना अपमानजनक हो सकता है फिर  तिरंगा तो देश कि जान है जिसके खातिर हिमालय की चोटियों पर हजारों वीर योद्धाओं ने अपने प्राणों की आहुति तक दे दी है। ये वही तिरंगा है जिसे सैनिक फहरा के आता है या इसमें लिपट कर।