Showing posts with label राष्ट्रवाद. Show all posts
Showing posts with label राष्ट्रवाद. Show all posts

Thursday, May 28, 2020

वर्तमान स्थिति को देखते हुए राष्ट्रवादी का जोश से भरा हुआ संदेश

 दुश्मनों के वक्षस्थलों को फाड़ कर उनको भस्म करके उनकी राख को भी क्षितिर वितिर कर देने का मज़ा ही कुछ और है ताकि फिर किसी अन्य आक्रांताओं या विदेशी ताकतों में दुस्साहस ना हो हमें आंख उठाकर कर देखें।थर थर कांप उठे शत्रु  वीरों की  रुद्र गर्जन से ।
धरती हुंकार रही है क्योंकि रक्त की प्यासी हो गई है! सिंधु की लहरे प्यासी है बूंद- बूंद रक्त की .. खंडित भारत माता की तस्वीर कहती है उठ अपने मां की दूध की लाज रख पूरे भारतवर्ष में अखंड ज्योति जला रक्त के बूंद से ताकि फिर से भारत अखंड हो जाय।


Monday, May 25, 2020

स्वर्गलोक में देवताओं के प्रश्न और मै.

किसी ने मुझसे पूछा कब तक तारीफ करोगे अपने देश की?
मैंने बोला, सीने में सांस रहेगी जब तक।
तब तक तारीफ करूंगा मै अपने देश की।

फिर  उसने पूछा कब तक रखोगे राष्ट्रवाद की भावना अपने दिल दिल में?
मैंने बोला, जबतक सूरज उगेगा नील गगन में।
तब तक राष्ट्रवाद कि भावना रहेगी मेरे दिल में।।

किसी दूसरे ने पूछा, क्या तुम खुश हो इस देश में जीवन पाकर?
मैंने बोला,जैसे एक बच्चे को खुशी हुई है अपने मां को पाकर।

आखिरी प्रश्न उठा क्या तुम्हारी तमन्ना है?
मैंने उत्तर दिया,अब अपने देश के लिए कुछ कर गुजरना है।
हर जीवन में अपने भारत देश में ही जन्म लेना है।।


Friday, April 10, 2020

मातृभूमि

जब बच्चा पैदा होता है तो माता के रक्त से बना दूध उसका पालन पोषण करता है । जब वह बड़ा हो जाता है तो  अपना पेट कहा से भरता है? इस धरा से उत्पन्न अन्न से ही न ये धरती ही न उसका पेट भरती है  जहां हम रहते है वो मां भारती है ... आपके विचार धर्म इत्यादि अलग हो सकते है पर मातृभूमि तो एक है न इसके लिए ही तो तन मन धन लुटाने की बात हम करते है। कुछ लोग आज कल वन्देमातरम् को सांप्रदायिक बताकर गाने से मना कर है। मै पूछता हूं इन लोगो से क्या मां की वंदना  करना या गीत गाना गुनाह है क्या? भारत माता की जय बोलना भी इन लोगों के लिए सांप्रदायिक हो जाता है! सबका अपना अपना विचार है जिसको बोलना है बोले जिसको नहीं बोलना है मत बोले।
पर जो आज वन्देमातरम् बोलने और भारत माता की जय बोलने से मना कर रहा है निश्चिंत ही वो कल को दुश्मन देश के शत्रुओं के विरुद्ध भी देश का साथ न दे या  यह कह ले कि विदेशी आक्रांताओं से हाथ मिला ले..
मेरे जैसे लोग देश को एकजुट करने के दिशा में काम कर रहे है करते रहेंगे। हमारी संस्कृति और सभ्यता सबसे पुरानी है एक से एक योद्धा यहां पैदा हुए रामायण , महाभारत, गीता पुराण वेद इसका जीता जागता उदाहरण है फिर भी हम कई दशकों और कोई सौ सालो तक गुलाम रहे है। हमे इन सब मुख्य बिंदुओं पर ध्यान देने की जरूरत है। 15 अगस्त को हम स्वतंत्रता दिवस मनाते है मिठाई बाटते है पर 14 अगस्त को भूल जाते जिस  दिन भारत माता को खंडित कर दिया गया था ...
उन तमाम वीर शहीदों की शहादत भी किसी को याद नहीं रहती है देश का इस तरह का विस्तार किया गया कि आज भी देश में घूसखोरी , भ्रष्टाचार आतंकवाद इत्यादि चरम पे रहता है!
इससे साफ पता चलता है कि आज भी विदशी पैरो की धूल हमारे पीठ पर लगी हुई है जिसे साफ करने की सख्त जरुरत है।।
जय हिन्द।।
जय भारत।।