Saturday, April 23, 2022

सिस्टम को समझने के ताजा तारीन तथ्य

लेखक: कृष्णकांत उपाध्याय

भाजपा सरकार बनाती हैं, कांग्रेस और लेफ्ट सिस्टम बनाते हैं जो उनके सत्ता में ना रहने पर भी अपना काम बखूबी कर सके और आज वही सिस्टम अपना काम कर रहा है, 
यह सिस्टम ही है जो रामनवमी और हनुमान जयंती के शोभायात्रा पर पथराव के बाद मौन हो जाता है और जैसे ही इन उपद्रवियों पर कार्यवाही होती है तो कोर्ट स्वतः संज्ञान लेते हुए रोक लगा देता है। यह सिस्टम ही है जो हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार के समय कोर्ट स्वतः संज्ञान नहीं लेता है। 
यह सिस्टम ही है जो करौली, खरगौन, जहांगीरपुरी में हिंदुओं पर हमला होने के बाद दौरा करने नहीं जाता है लेकिन जैसे ही दंगाइयों पर कार्यवाही होती है तो पंहुचना शुरू हो जाता है। ( औवैसी, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, लेफ्ट आज दौरा करने जा रहे हैं जहांगीरपुरी)इनमें से कोई भी करौली, खरगौन, लोहरदगा का दौरा नहीं किया। 
 
यह सिस्टम ही है जो हिंदुओं पर अत्याचार को मिडिया में बहस का हिस्सा नहीं बनने देता है बल्कि बहस इस पर शुरू कर देता है कि “बुलडोजर चलाना वैध या अवैध”। 
यह सिस्टम ही है जो हिंदूओं पर हुए पथराव पर सामने नहीं आता है तब सामने आता है जब पता चलता है कि शोभायात्रा की अनुमति ही नहीं ली गई है। यह सिस्टम ही है जो दिल्ली को बेवजह बंधक बनाए रखता है और कोर्ट मौन रहता है। 
यह सिस्टम ही है जो राणा अयूब जैसी पत्तलकारिता करनेवाली को देश के बाहर जाकर देश के खिलाफ बोलने के लिए आदेश दे देता है यह कहकर कि 10-12 करोड़ की चोरी कोई बड़ी चोरी नहीं होती है।

यह सिस्टम ही है जो हिंदुओं के पलायन पर मौन रहती है।
यह सिस्टम ही है जो कश्मीरी पंडितों के नरसंहार पर विधानसभा में ठहाके लगाकर मजाक उड़ाता है।
यह सिस्टम ही है जो मिडिया को दंगाइयों के साथियों का बयान चैनलों पर दिखाती है लेकिन दंगाइयों के जुल्म के शिकार हुए लोगों को चैनलों पर नहीं दिखाते हैं।
यह सिस्टम ही है जो हिंदुओं की गंगा और यमुना दोनों हैं जो पूज्यनीय हैं उन्हीं को सेक्लुरिजम के नाम पर गंगा-जमुनी तहजीब सिखाती है। यह सिस्टम ही है जो बहुत चालाकी से जयकारों(भारत माता की जय, जय श्री राम, वंदेमातरम) को नारों में तब्दील कर देती है। 

यह सिस्टम ही है जो यह बताती है कि यूपी में ब्राह्मण नाराज है लेकिन यह नहीं बताती कि मुस्लिम सपा को एकतरफा वोट कर रहे हैं जिससे हिंदुओं का वोट एकजुट हो जाए। 
यह सिस्टम ही है जो अयोग्यताओं से परिपूर्ण व्यक्तियों को पद देकर सिस्टम का हिस्सा बनाता है और अंत में यही सिस्टम हिंदू समझ नहीं पाते हैं और हिंदू का विरोध करते हैं, साथ नहीं देते हैं, आगे बढ़ने के लिए प्रेरित या सहयोग करना तो दूर उनकी टांग खिंचकर गिराते हैं, जातियों में बंटकर लड़ते हैं और कटते है।

 कल राजस्थान की कांग्रेस सरकार के कुकृत्य ने यह साबित भी कर दिया कि सिस्टम के संदर्भ में मेरा विचार सही है, कल राजस्थान के अलवर जिले में एक 300 साल पुराना शिव मंदिर तोड़ दिया गया बल्कि मंदिर तोड़ा ही नहीं गया है पहले भगवान शिव के शिवलिंग को ड्रिल मशीन से उखाड़ा गया, अन्य मूर्तियों को तोड़कर कचरे में फेका गया फिर मंदिर को तोड़ा गया। 
अलवर में शिव मंदिर तोड़ा गया - फोटो : Social Media

अब इसी घटना को देखिए और अपने विचारों के तराजू में तौलिए जहांगीरपुरी में अवैध कब्जों पर बुलडोजर चला तो सिस्टम का एक एक सैनिक अपने अपने काम पर लग गया क्योंकि वहां मामला मुसरिम का था लेकिन राजस्थान के अलवर में जो कांग्रेस सरकार ने किया उस पर सिस्टम का एक एक सैनिक शुतुरमुर्ग की तरह रेत में मुंह डालकर बैठ गया क्योंकि यहां बात हिंदुओं की थी। यह वही सिस्टम है जो मस्जिद की अवैध दीवार पर कोर्ट तक चला जाता है और शिव मंदिर को तोडऩे पर खामोश हो जाता है। यह वही सिस्टम है जो जहांगीरपुरी में अवैध कब्जे पर चले बुलडोजर पर स्वतः संज्ञान लेता है लेकिन अलवर के शिव मंदिर पर मौन है। 

यह वही सिस्टम है जो मिडिया में जहांगीरपुरी का “बुलडोजर वैध या अवैध” पर बहस कराना शुरू कर देता है लेकिन 300 साल के धरोहर के रूप में खड़े शिव मंदिर को तोड़ने पर कोई बहस नहीं होती। यह वही सिस्टम है जो जहांगीरपुरी में दौरा पर दौरा ( ओवैसी, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधि मंडल) करता है, लेकिन अलवर का 300 साल पुराना शिव मंदिर तोडें जाने पर कोई नहीं जाता।
यह वही सिस्टम है जो जहांगीरपुरी पर फेसबुक, ट्विटर, मिडिया में आकर “अल्पसंख्यकों पर अत्याचार”, “संविधान खतरे में”, “लोकतंत्र की हत्या” बताता है लेकिन 300 साल धरोहर रूपी शिव मंदिर पर सिस्टम अंधा, बहरा, लूला, लंगडा, गूंगा तक हो जाता है। 
इस सिस्टम से निपटने के लिए हर किसी को आदत डाल लेनी चाहिए। क्योंकि जब तक आप केवल सरकार बनाएंगे तब तक आप कोई भी वैचारिक लड़ाई नहीं जीत पाएंगे लेकिन जिस दिन आप सिस्टम बनाना शुरू कर देंगे उस दिन आप बड़े से बड़ा वैचारिक युद्ध जीत जाएंगे। 
वैसे भी इस सिस्टम के रहते हुए अब इस देश में किसी गजनी, खिलजी, बाबर, औरंगजेब की जरूरत नहीं है जो अयोध्या में राम मंदिर की जगह बाबरी, काशी में विश्वनाथ मंदिर की जगह ज्ञानवापी, मथुरा में जन्मस्थान से लगाकर मस्जिद खड़ी कर दे, उसके लिए इस देश का सेक्लुरिजम से ग्रसित हिंदू ही काफी हैं....!




Saturday, February 26, 2022

सत्ता के खातिर ना जाने कहा तक गिरेंगे

आज ही के दिन 2019 में "एयर स्ट्राइक" करके भारतीय वायुसेना ने पुलवामा हमले में वीरगति को प्राप्त हुए सीआरपीएफ के जवानों का बदला लिया था। 14 फरवरी को 2019 को पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने दक्षिण कश्मीर में पुलवामा के पास जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग पर सीआरपीएफ के काफिले को निशाना बनाया था, जिसमें 40 सीपीआरएफ के जवान वीरगति को प्राप्त हुए थे । यह एक आत्मघाती हमला था। इसके कुछ दिनों के बाद भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के खैबर पख्तूनवा प्रांत के बालाकोट में एक शिविर पर हवाई हमला किया था और पाक स्थित आतंकी कैंपों का खात्मा कर दिया था। यह समय था सेना के पीछे एकजुट होने का तो विपक्षी पार्टी के नेता लोग घटिया बयान देकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहे थे। 

जरा उस समय के कुछ बयानों पर गौर फरमाएं-

ममता बनर्जी -
मोदी बाबू, हमलेे के समय आप कहां थे?, आपको पहले से पता था कि यह घटना होगी। आपके पास पहले से जानकारी थी। केंद्र सरकार केेेेेेे पास इस संबंध में खुफिया जानकारी थी। फिर जवानों को उस दिन हवाई मार्ग से क्यों नहीं जानेे दिया गया? काफिले के मार्ग की नाका जांंच क्यों नहीं की गई ? जवानों को मरने केेे लिए क्यों छोड़ दिया गया ?  इसलिए कि आप चुनावों से पहलेे मामले का राजनीतिकरण करनाा चाहते थे। हमारेेे जवानों के खून का इस तरह राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। मोदी शांति के संदेशवाहक होने का नाटक करते हैं। वही उनकी पार्टी गुप्त रूप से देश में युद्ध समान परिस्थितियां पैदा करना चाहती है और दंगा करना शुरू देती है।

अरविंद केजरीवाल- देश शहीदों के गम में रो रहा था, देश गुस्से में था अपमानित महसूस कर रहा था। मंगलवार को देश ने सख्त संदेश पाकिस्तान को दिया, पर दोबारा देश की आत्मा रो पड़ी। जब देश और जवान नहीं बचेगा तो बूथ कहां से बचेगा। आखिर, चुनाव जीतने के लिए पीएम मोदी को कितनी लाशें चाहिए।

पी. चिदंबरम- भारतीय वायुसेना के वाइस एयर मार्शल ने हताहतों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया कि कोई नागरिक या सैनिक हताहत नहीं हुआ। तो, हताहतों की संख्या 300-350 किसने बताई? एक नागरिक के तौर मैं अपनी सरकार पर भरोसा करने के लिए तैयार हूं लेकिन अगर हम चाहते हैं कि दुनिया को भरोसा हो तो सरकार को विपक्ष को कोसने की बजाय इसके के लिए प्रयास करना चाहिए।

दिग्विजय सिंह- हमें हमारी सेना पर और उनकी बहादुरी पर गर्व है व संपूर्ण विश्वास हैं। किंतु पुलवामा दुर्घटना के बाद हमारी वायुसेना द्वारा की गई एयर स्ट्राइक के बाद कुछ विदेशी मीडिया में संदेह पैदा किया जा रहा है, जिससे हमारी सरकार की विश्वसनीयता पर भी प्रश्न चिह्न लग रहा है।

कपिल सिब्बल-  मोदी जी! क्या इंटरनेशनल मीडिया... न्यूयॉर्क टाइम्स, वॉशिंगटन पोस्ट, डेली टेलीग्राफ, द गार्जियन, रॉयटर्स ने बालाकोट में आतंकियों को किसी  तरह का नुकसान न होने का सुबूत दिया है? आप,आतंक का राजनीतीकरण करने के लिए दोषी हैं? 

बसपा सुप्रीमो मायावती- भाजपा अध्यक्ष अमित शाह दावा करते हैं कि एयर फोर्स की स्ट्राइक में 250 आतंकवादी मारे गए हैं लेकिन उनके गुरु जो हमेशा हर बात पर क्रेडिट लेते हैं, इस मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं।

नवजोत सिंह सिद्धू- वहां आतंकियों को मारने गए थे या पेड़ उखाड़ने। क्या  मुट्ठी भर लोगो के लिए एक पूरे देश को या किसी एक व्यक्ति को दोषी ठहराया जा सकता है। आतंकवाद का कोई देश नहीं होता , ना आतंकियों का कोई मजहब।

बीके हरिप्रसाद- पुलवामा हमले के बाद के घटनाक्रम पर यदि आप नजर डालेंगे  तो पता चलता है कि यह पीएम मोदी और पाकिस्तान के प्रधामंत्री इमरान खान के बीच मैच फिक्सिंग थी।

सपा नेता राम गोपाल यादव ने दावा किया था कि पुलवामा आतंकवादी हमला वोट हासिल करने के लिए रचा गया ‘‘षड्यंत्र'' था।

सेना के एक पूर्व अधिकारी का कहना है जब बिना जांचे-परखे न्यूज फैलाई जाती है तो उसका फायदा चीन और पाकिस्तान और उन तत्वों को होता है, जो हमारे देश को बर्बाद करना चाहते हैं।पिछले 3 साल में कई राजनीतिक दल एयर स्ट्राइक के सबूत मांग चुके हैं।

इसी तरह 2016 में जब उड़ी हमले के बाद भारतीय थल सेना ने 28 -29 सितंबर 2016 को पीओके में दाखिल होकर पाकिस्तान के कई आतंकी अड्डों को ध्वस्त किया। सेना की इस कार्रवाई में भी बड़ी संख्या में आतंकवादी मारे गए थे। बाद पाकिस्तान ने माना कि पीओके में भारतीय सेना दाखिल हुई और ऑपरेशन किए । लेकिन राहुल गांधी सहित विपक्ष के कई नेताओं ने सेना के पराक्रम पर सवाल उठाते हुए हमले के सबूत मांगे थे। सेना ने वीडियो जारी कर इन लोगो के मुंह पर झन्नाटेदार तमाचा भी मारा है।

Thursday, December 23, 2021

हाथी जितना सुस्त होगा कमल उतना ही खिलेगा।

लेखक: कृष्णकांत उपाध्याय

मैं खुद को चुनाव विशलेषक नहीं मानता, लेकिन अभी कुछ दिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर अवध और पूर्वांचल के क्षेत्रों में जाना हुआ, तो मालूम पड़ा की भाजपा वापसी कर रही है लेकिन जैसी वापसी भाजपा के लोग बता रहे हैं। भाजपा वैसी वापसी नहीं कर रही है जैसी 2017 में प्रचंड बहुमत थी, वापसी 230+ सीटों के साथ कर रही है क्योंकि तथाकथित किसान आंदोलन का खामियाजा उठाना पड़ेगा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रों में बाकी पूर्वांचल, अवध और बुंदेलखंड में भाजपा मजबूत नजर आ रही है और यहां जौनपुर और आजमगढ़ को छोड़ दें तो भाजपा हर जगह से एकतरफा निकल रही है।

भाजपा के वापसी का कारण एक नहीं अनेक प्रमुख कारण हैं जैसे-  
               
गावों में 18 घंटे बिजली का रहना, गावों तक सड़कों का जाल बिछना (कुछ क्षेत्रों को छोड़कर), कोरोना काल से ही मुफ्त राशन, लाकडाउन के समय महिलाओं के जनधन अकाउंट में तीन माह तक ₹500 तक देना, किसानों के अकाउंट में सलाना ₹6000 का वितरण, अयोध्या दिपोत्सव, अयोध्या में श्री रामजन्मभूमि का निर्माण, काशी में बाबा काशी विश्वनाथ जी का कारीडोर, मुफ्त कोरोना वैक्सीन, इत्यादि। ये सारी चीजें भाजपा को जमीनी स्तर तक पहुंचने में मदद की हैं। 

योगी आदित्यनाथ की छवि - 

सबसे अधिक अगर भाजपा को जमीन से जोडने का काम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बुलडोज़र चलाने वाली छवि ने कार्य किया है। 
इस सब से प्रदेश के लोगों को लगा की उत्तर प्रदेश में कोई पहला मुख्यमंत्री है जो बाहुबलियों को घुटने टेकने पर मजबूर किया है। शहर में किसी को लगे या ना लगे लेकिन गावों में लोग इससे प्रभावित हुए हैं।

विपक्ष के बयान वीरों के घातक बयान- 

भाजपा को मजबूती देने का कुछ काम तो विपक्ष में बैठे बयान वीरों ने ही किया है जैसे - अखिलेश यादव का कोरोना वैक्सीन पर दिया गया ज्ञान, अखिलेश यादव का जिन्ना के प्रति दिया गया ज्ञान भी इस कड़ी में भाजपा को आगे कर रहा है और अभी हाल ही में कई सपा नेताओं द्वारा लडकियों के शादी की उम्र को लेकर दिया गया बयान भी भाजपा को मजबूती देने का काम किया है।

इस बयान वीरों की श्रृंखला में केवल समाजवादी पार्टी के बयान वीर नहीं है बल्कि इस देश के सबसे बड़े बयान वीर माननीय श्री राहुल गांधी जी भी आगे ही हैं। उनका हिंदू और हिंदुत्व पर हर तीसरे दिन दिया जाने वाला बयान प्रियंका वाड्रा के मंदिर दर्शन और तिलक को तिरस्कृत कर रहा है। एक तरफ प्रियंका वाड्रा मंदिर में जाकर कांग्रेस को प्रदेश में तीसरे नंबर की पार्टी बनाने की कोशिश कर रही हैं तो राहुल गांधी अपने हिंदू-हिंदुत्व ज्ञान से कांग्रेस को और नीचे धकेल रहे हैं।

औवैसी फैक्टर - 

वैसे तो असुद्दीन औवैसी को विपक्ष की पार्टियां भाजपा की B टीम कहती हैं और उनका ये कहना गलत नहीं है क्योंकि औवेसी जहाँ भी चुनाव लड़ते हैं वहां मुस्लिम मतों में बिखराव कर भाजपा को मदद ही करते हैं। उदाहरण के तौर पर सबसे पहले महाराष्ट्र में एनसीपी और कांग्रेस को नुकसान पहुंचाया फिर उसके पश्चात बिहार में आरजेडी और कांग्रेस को नुकसान पहुंचाया। अब जहां मुस्लिम मतों का बिखराव होगा वहां विपक्षी पार्टियों को नुकसान तो होगा ही और यही नुकसान भाजपा को फायदा पहुंचाता है। 

बसपा का जमीनी स्तर पर कमजोर होना - 

भाजपा के जीत का आखिरी कारण और मजबूत कारण बसपा का जमीनी स्तर पर कमजोर होना है। हाथी जितना सुस्त होगा कमल उतना ही खिलेगा। क्योंकि बसपा का कोर वोटर समाजवादी पार्टी को कभी वोट नहीं करता है और ना ही कभी करेगा। इसका उदाहरण 2019 के लोकसभा चुनावों में देखा जा चुका है सपा- बसपा गठबंधन के बावजूद बसपा का कोर वोटर सपा को वोट नहीं किया और नतीजा सपा अपने घर की सीटें भी हार गई। बसपा के न जीतने की स्थिति में बसपा के वोटर भाजपा को वोट करेंगे और भाजपा मजबूत होती जाएगी...

ऐसा नहीं है कि सपा मजबूत नहीं है लेकिन अभी की सपा कमजोर हो गई है। 2012 में जब सपा प्रचंड बहुमत से सरकार में आई थी तो वो वक्त अलग था। उस समय मुलायम सिंह यादव, आजम खां, शिवपाल सिंह यादव, रामगोपाल यादव जैसे नेता का जमीन पर पकड़ और अपने मतों को जोड़े रखने की राजनीतिक कौशल मजबूत थी। उस समय नरेन्द्र मोदी गुजरात से बाहर नहीं निकले थे। नरेन्द्र मोदी का लहर नहीं था। उस समय योगी आदित्यनाथ जी का प्रदेश राजनीति में जन्म नहीं हुआ था वो एक लोकसभा और आस पास तक ही सीमित थे। लेकिन आज अखिलेश यादव अकेले हैं ना मुलायम सिंह यादव सक्रिय हैं ना आजम खां जो अपने पारम्परिक मतों के बिखराव को रोक लें। शिवपाल सिंह यादव का दल तो अखिलेश यादव से मिल गया लेकिन दिल मिलने में वक्त लगेगा क्योंकि ये चुनावी मिलन है पारिवारिक मिलन नहीं और इसीलिए दल मिले हैं दिल नहीं। और जब तक दिल मिलेंगे तब तक देर हो गई होगी....

बाकी समय का इंतजार करें। 

( लेखक  इलहाबाद विश्वविद्यालय से आधुनिक इतिहास एंव हिंदी विषयों में स्नातक और महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से शिक्षा शास्त्र में स्नातक हैं। हिन्दी एंव शिक्षाशास्त्र से परास्नातक किया हैं।)
 

Monday, December 13, 2021

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद से शिव के कॉरिडोर तक

 संस्कृति से सरोकार न रख कर सर्वांगीण विकास का सपना देखने वाले राष्ट्र कालांतर में बरबाद गये। भारत में भी सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को वर्षों तक उपेक्षित किया गया। देश का सौभाग्य है कि इसके महत्व को समझने वाला भारत माता का एक ऐसा सच्चा सपूत नरेन्द्र भाई दामोदर दास मोदी के रूप में अवतरित हुआ। जिसने अपने सांस्कृति राष्ट्रवाद के विचारों को अमली जामा पहनाते हुए पूरे विश्व में इसकी धाक जमा दी है। समाज की समझ जरूरी है, भारत जैसे विशाल देश की समझ सामान्य नागरिक के बस की बात नहीं हैं। मैं मोदी को तो एक एक परिपक्व समाजशास्त्री मानता हूं और उसका की परिणाम है कि भारत पूरी तेजी से विकास की राह पर अग्रसर है। पूरा विश्व भारत के नेतृत्व को स्वीकार करने को मानसिकता बना रहा है।
भारत सदियों अनेक बाह्य एवं आंतरिक आक्रमणों एवं कुचक्रो के बाद भी एक जीवंत राष्ट्र बना रहा, उसका मूल धारणा उसकी संस्कृति एवं संस्कृति की निरंतरता रही है।भारत का प्राण उसकी संस्कृति है और उसकी प्राण वायु प्रदान करने वाली 135 करोड़ देशवासियों की विशाल फौज देश के प्रति अगाध श्रद्धाभक्ति भागौलिक राष्ट्रवाद की संकल्पना नही ला सकती है । सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की अवधारणा ज्यादा महत्वपूर्ण है। भारत ऋषि मुनियों एवं अनेकानेक वैदिक ग्रंथों ने संपूर्ण सृष्टि के कल्याण कि जो कल्पना की वह अन्यत्र देश में नहीं मिलती है। हम संस्कृति के पोषक पुजारी हैं संस्कृति हमारी पहचान है। संस्कृति हम सभी को आपस में प्रेम एवं बंधुत्व का सटीक पाठ कराते हुए न केवल दिल से जोड़ती है अपितु मानवीय गुणों की समस्त आवश्यकताओं एवं संभावनाओं से युक्त बनाती है। औपनिवेशिक शक्तियों एवं दुर्दांत मुगल आक्रमणकारियों ने जितना हमारी संस्कृति के साथ खिलवाड़ करने का प्रयास किया ,उतना ही वें असफल हुए। यह सही है कि हमारी पहचान मिटाने की कोशिश की गई और इसी क्रम में हमारे धार्मिक व सांस्कृतिक धरोहरों एवं आस्था के केंद्रों को ध्वस्त कर दिया गया। हमारा मनोबल टूटा लेकिन यह बहुत दिनों तक निम्न रहा। ऐसा नेतृत्व आया जिसने टूटे मनोबल को पुनर्जीवित किया और सम्मान की ज्योति आकाश को छूने लगी है। 

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद भारत की सांस्कृतिक, भौगोलिक, प्रजातीय इत्यादि विविधताओं को एकता में परिवर्तित करता है। इसमें हमें जो बल प्राप्त होता है वह राष्ट्रवाद की भावना को प्रबल करता है। इस भावना की प्रबलता को बनाए रखना देश की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। हमें अपने सांस्कृतिक आधारों को मजबूती प्रदान करना है ताकि राष्ट्रप्रेम की भावना अक्षुण हो और देशभक्ति की अलख पूर्ण सम्मान के साथ निरंतर जलती रहे। हमारे प्रधानमंत्री जी ने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की जो अलख जलायी, उसके अंतर्गत संपूर्ण भारत में विविध कार्य सम्पादि किये जा रहे हैं। एकता के नैतिक प्रतीक सरदार वल्लभ भाई पटेल का स्मारक एक सफल प्रयास है। 
देश की सांस्कृतिक एकता का संभावना शिव है जो काशी के अधिष्ठता हैं। काशी भारतीय धर्म एवं संस्कृति का जीवंत संग्रहालय हैं। यह देवाधिदेव महादेव विश्वनाथ की ऐसी नगरी है जिसके कण- कण में विद्यमान है। शिव की महिमा अपरंपार है। वे परम ब्रह्म हैं। काशी संपूर्ण भारत में पूजनीय है। काशी का जीवन शिव के विराट व्यक्तित्व की छवि है। द्रविड़ सभ्यता हो या देश की कोई भी सभ्यता और सभी ने शिव की इस नगरी को अपने तीर्थ स्थली के रूप में अंगीकार किया है तथा काशी विश्वनाथ के दर्शन को प्राप्त करने के सुयोग की कामना की है। प्रत्येक हिंदू काशी आने को अपना सौभाग्य मानता है और शिव दर्शन को अहोभाग्य। यह शिव के कारण ही अनेकता में एकता का अद्भुत परिवेश दिखाई पड़ता है। एकात्मकता जो दर्शन होता है वह संपूर्ण काशी के अधिवास के प्रतिरूप को देखकर समझा जा सकता है। काशी लघु भारत है। विश्वनाथ की नगरी में क्षेत्रीय था एवं प्रांतीय था कि संकीर्ण में भावना नदारद है। इसी का परिणाम है कि सर्वत्र काशी की भी पूछ होती है, वह सर्वत्र पूजनीय और वंदनीय होता है। शिव शंकर और गंगा से युक्त काशी सर्व समर्थ है लेकिन वर्षो से विश्वनाथ दरबार का एक ऐसा स्वरूप भी है जो सब को कष्ट देता रहा है तथा मंदिर की छवि को धूमिल करता रहा है। वह है, इसके आसपास संकरी तंग गलियां, अपर्याप्त दर्शन, भीड़ भाड़ व अव्यवस्था तथा गंगाजी तक की कष्टकारी पहुंच। श्री विश्वनाथ मंदिर हिंदू एकता का एक ऐसा अद्वितीय विशाल आस्था का केंद्र है, जहां ही नहीं विदेशों से भी हिंदू भक्त प्रति वर्ष श्रद्धा पूर्वक आते हैं। शिव प्रदत्त सांस्कृतिक एकता में जो सबसे बड़ी बाध थी, वह मंदिर में प्रवेश से लेकर ज्योति स्वरूप लिंग के संगम दर्शन पूजन तक की रही। किसी जमाने में मां गंगा जो वहीं पास से बहती रही, श्रद्धालु उनमें स्नान कर मंदिर में प्रवेश करते रहे। सरकारें आयी और गई किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। अंततः वर्ष 2014 में मां गंगा ने नरेंद्र मोदी जी को बुला ही लिया। भगवान शिव का आशीर्वाद ना केवल मोदी जी को ही प्राप्त हुआ अपितु काशी वासियों एवं संपूर्ण देशवासियों को भी प्राप्त हुआ। हमारा आत्म सम्मान पुनः प्रतिष्ठित हुआ है। सनातन धर्म सत्यम शिवम सुंदरम पर आधारित है। ऐसे सनातन धर्म की शाश्वत मोदी जी के प्रयास से और भी सुदृढ़ एवं सुगम हुई है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की यह पहल राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करेगी और भारत को विश्व गुरु के रूप में प्रतिष्ठापित करेगी।

( प्रस्तुत लेख काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग में प्रोफेसर अरविंद कुमार जोशी जी का है । लेख का का स्रोत "राष्ट्रीय सहारा अखबार"। )


Monday, November 15, 2021

प्रधानमंत्री के कुशल नेतृत्व में जनजाति के हितों का संरक्षण

लेखक:- शिवराज सिंह चौहान

स्वाधीनता के लिए जनजातीय संघर्ष के महानायक भगवान बिरसा मुंडा जी की जयंती पर उन्हें शत शत नमन। भगवान बिरसा मुंडा गरीबों के सच्चे भगवान थे। उन्होंने शोषित और वंचित वर्ग के लिए जीवनपर्यंत संघर्ष किया। स्वतंत्रता आंदोलन में उनका योगदान और सामाजिक सद्भावना के लिए किए गए प्रयास हम सभी को सदैव प्रेरित करते हैं। बिरसा मुंडा ने अपने सुधारवादी आंदोलनों से लोगों के लिए आदर्श प्रस्तुत किया। भगवान बिरसा मुंडा ने नैतिक आत्म-सुधार ,आचरण की शुद्धता और एकेश्वरवाद का उपदेश दिया। ऐसे  ही क्रांतिवीर नायक का स्मरण करने के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने आज  दिन जनजातीय गौरव दिवस मनाने का फैसला लिया है। मुझे बेहद खुशी है कि माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की सरकार ने 15 नवंबर को देश में जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया है। इसके के लिए मैं माननीय प्रधानमंत्री जी को धन्यवाद देता हूं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी जनजातीय लोगों के विकास को लेकर कितने संवेदनशील है, इसका आंकलन इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने गुजरात में मुख्यमंत्री रहते हुए जनजातीय भाई-बहनो के विकास से जुड़े कई  अहम फैसले लिए। कई मुश्किलें आई, लेकिन राज्य ने नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में इन तमाम मुश्किलों को अवसर में बदल दिया। मोदी जी कहते हैं कि विकास की गति को तेज करने का हमारा  दृढ़ संकल्प है, ताकि गरीब से गरीब व्यक्ति भी इस विकास यात्रा का सक्रिय भागीदार बन सके। उन्हीं के नेतृत्व में राज्य ने जनजातीय समुदाय के विकास के नवीन आयामों को छुआ। गुजरात में मुख्यमंत्री रहते हुए नरेंद्र मोदी जी ने आदिवासी समुदाय के सर्वांगीण विकास के लिए वर्ष 2007 में 10 सूत्रीय वनबंधु योजना शुरू की। इसमें वनवासी बच्चों के उच्च शिक्षा, आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं, पीने का शुद्ध जल, सिंचाई सहित स्थानीय स्तर पर रोजगार से जुड़ी योजनाओं का सीधा लाभ जनजाति लोगों को मिला। संकलित डेयरी विकास योजना के तहत 1 लाख 42 हजार लोगों को दुधारू पशु दिए गए। यही नहीं, राज्य की साक्षरता दर को 45.7% से बढ़ाकर 62.5% पहुंचाया। दूध संजीवनी योजना के तहत 11 लाख छात्रों को पोस्टिक तो दूध दिया गया। सिकल सेल के लिए एक करोड़ से अधिक जनजाति लोगों की स्क्रीनिंग कर उन्हें स्वस्थ बनाया। आवासीय योजना से 6 लाख 30 हजार लोगों के घर का सपना पूरा किया।

जनजातीय लोगों की विकास कार्य कार्य गुजरात तक ही सीमित नहीं रहा। प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी जी ने इस प्रक्रिया को सतत जारी रखा। आज भारत दुनिया के बड़े जनजाति समाज के विकास के इस कार्यक्रम का नेतृत्व कर रहा है। 11 करोड़ से अधिक जनजाति समाज के हितों को संरक्षण प्रदान करने का कार्य नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने जनजातीय वर्ग के कल्याण के लिए वनबंधु कल्याण योजना, आदिवासी शिक्षा ऋण योजना,सावधि ऋण योजना, आदिवासी महिला सशक्तिकरण, स्वयं सहायता समूह के लिए सूक्ष्म ऋण योजना, एकलव्य मॉडल आवासीय विकास जैसी कई योजनाएं शुरू की। जिनका सीधा लाभ जनजाति वर्ग को मिल रहा है। प्रधानमंत्री जी का संकल्प है कि पूरे जनजातीय समाज की जल, जंगल और जमीन पर आंच नहीं आएगी। आज जनजाति समाज स्वयं को सुरक्षित और सम्मानित महसूस कर रहा है। जनजाति समाज जितना मजबूत होगा, देश उतना ही मजबूत बनेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश विकास की नई करवट ले रहा है। प्रधानमंत्री जी के संकल्प 'सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास' से ही प्रेरित है प्रदेश की जनजाति विकास और कल्याण की योजनाएं। जनजाति समाज के चहुंमुखी विकास, स्थान और मान-सम्मान की रक्षा के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध हैं। पिछले 17 वर्षों से हमने जनजातीय समाज को बराबर के अधिकार सुनिश्चित करने की दिशा में कई ऐतिहासिक फैसले लिए हैं। वर्ष 2003-04 में जनजातियों के विकास के लिए महज 746.60 करोड़ रुपए का बजट था, जिसे हमने बढ़ाकर 8085.99 करोड़ तक पहुंचाया।
पं. दीनदयाल उपाध्याय जी कहते थे  दरिद्र ही हमारा नारायण है और उसकी सेवा ही हमारी पूजा, उनके इस विचार  से हमको  प्रेरणा मिलती है।  हमने जनजातीय क्षेत्रों में 24 घंटे  घरेलू बिजली और 10 घंटे कृषि कार्यों के लिए बिजली देने का इंतजाम किया। यही नहीं, जल जीवन मिशन के माध्यम से वनवासी अंचलों  के अलावा पूरे प्रदेश में पीने का शुद्ध पानी हर घर में नल से प्रदान किया जा रहा है। पिछले  17 वर्षों में 2 लाख किलोमीटर से अधिक सड़को का जाल बिछाया गया है। प्रदेश में अनुसूचित जनजाति ऋण विमुक्ति अधिनियम 2020 लागू किया गया है जो आज से (15 नवंबर 2021) से पूरे प्रदेश में प्रभावशील होगा। प्रदेश सरकार ने जनजातीय समाज को उनकी उपज का सही मूल्य मिले इसके लिए  समर्थन मूल्य निर्धारित किया है। तेंदूपत्ता बेचने का कार्य जनजातियों की वन समिति द्वारा किया जायेगा। तेंदूपत्ता संग्रहित करने वाली जनजातियों को मध्यप्रदेश सरकार द्वारा चरण पादुकाएं प्रदान की जा रही है।

वनवासी अंचलों का तेजी से विस्तार करना मध्यप्रदेश सरकार की प्राथमिकता है। पिछले चार वर्षो में मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना से 5 हजार 500 से अधिक जनजातीय छात्र-छात्राएं लाभान्वित हुए हैं। शैक्षणिक  सत्र 2020-21 एवं 2021-22 में 27 नए एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों का निर्माण किए जाने की योजना है। 1 वर्ष के भीतर बैकलॉग के पदों को भरने की योजना है। छिंदवाड़ा विश्वविद्यालय का नाम राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय किया गया। वनवासी अंचल  की संस्कृति आनंद की संस्कृति है। इसीलिए हमने फैसला किया है कि हर वर्ष झाबुआ उत्सव मनाया जायेगा।
ग्राम सभा को सामुदायिक संसाधनों की सुरक्षा और संरक्षण का अधिकार देने के लिए पेसा एक्ट लागू करने का ऐतिहासिक कदम उठाया है।  वनाधिकार अधिनियम के अंतर्गत 34 हजार परिवारों के दावे मान्य किए गए। स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध हो सके इसके लिए देवाण्य योजना शुरू की गई। जनजाति लोगों को सिकल सेल एनीमिया बीमारी से बचाव के लिए नि:शुल्क इलाज की व्यवस्था की गई है। इसके लिए आज से सिकल सेल मिशन शुरू किया जाएगा। राशन आपके द्वार योजना से जनजातीय  भाई-बहनों को अब राशन लेने के लिए कहीं जाना नहीं पड़ेगा। इन दोनों ही योजनाओं का शुभारंभ आज माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी करने जा रहे हैं।
मैं दोनो बाहें फैलाकर जनजातीय समाज का आह्वान करता हु की वे अपनी जिंदगी बदले। विकास की दौड़ में जो पीछे और नीचे रह गए है उन्हें आगे लाने के लिए मैं  सब कुछ करूंगा। जनजातीय समुदाय जितना सशक्त होगा, आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश निमार्ण की हमारी संकल्पना उतना ही मजबूत होगी। जनजातीय समुदाय के विकास के लिए मैं और मेरी सरकार समर्पित थे, समर्पित है और हमेशा समर्पित रहेंगे।

(लेखक मध्यप्रदेश के  मुख्यमंत्री है।  प्रस्तुत लेख राष्ट्रीय सहारा में छपा था जिसे राष्ट्रचिंतक ब्लॉग पर प्रकाशित किया गया है।)